नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
21 जुलाई 2026 (मंगलवार) को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 5:16 बजे तक है। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। इस दिन पार्वती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का शुभ संयोग बन रहा है। माता पार्वती और देवी दुर्गा की पूजा करना सबसे लाभकारी रहेगा।
इस दिन सुबह 5:56 बजे सूर्योदय और शाम 7:09 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर 12:28 बजे चन्द्रोदय और रात 11:53 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 21 जुलाई 2026 को सूर्य पुष्य नक्षत्र में गोचर करेगा। जबकि चंद्रमा रात 8:49 बजे तक चित्रा नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
वहीं, 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा; इस दिन सिद्ध योग मौजूद रहेगा। मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से लेकर 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है।
वहीं, राहुकाल दोपहर 3:27 से 5:09 बजे के बीच रहेगा, गुलिक काल दोपहर 12:44 से 2:23 बजे तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 9:02 से दोपहर 10:45 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है।
वहीं, 21 जुलाई (मंगलवार) को सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा भी मुख्य रूप से सुबह 8:00 बजे तक कन्या राशि में संचार करेगा, इसके बाद तुला राशि में प्रवेश करेगा। सोमवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
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