नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। हमारा शरीर जब किसी परेशानी से गुजरता है तो कई बार पहले ही छोटे-छोटे संकेत देने लगता है। बस जरूरत होती है उन संकेतों को समझने की। जैसे अचानक बहुत ज्यादा थकान होना, भूख कम लगना या पेट खराब रहना किसी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है। इसी तरह पेशाब करने के तरीके में बदलाव भी शरीर का एक जरूरी संकेत हो सकता है।
अगर कुछ दिनों से पेशाब करते समय जलन हो रही है, बार-बार पेशाब लग रहा है या पेशाब करने के बाद भी ऐसा लग रहा है कि अभी और पेशाब बाकी है, तो इसे सामान्य समझकर टालना ठीक नहीं है। कई बार इसकी वजह कम पानी पीना हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में ये यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई का संकेत भी हो सकता है।
यूटीआई यानी पेशाब की नली और उससे जुड़े अंगों में होने वाला संक्रमण है। जब कुछ बैक्टीरिया पेशाब की नली के रास्ते शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं और वहां बढ़ने लगते हैं, तब संक्रमण होता है। यह संक्रमण पेशाब की नली, पेशाब की थैली यानी ब्लैडर या फिर किडनी तक को प्रभावित कर सकता है। आमतौर पर यूटीआई का इलाज आसानी से हो जाता है, लेकिन अगर संक्रमण बढ़ जाए और किडनी तक पहुंच जाए तो परेशानी गंभीर हो सकती है।
पेशाब करते समय जलन यूटीआई का सबसे आम संकेत माना जाता है। इसके साथ बार-बार पेशाब आता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन भी महसूस होता है। कुछ लोगों के पेशाब से सामान्य से ज्यादा तेज गंध आने लगती है या पेशाब साफ होने के बजाय धुंधला दिखाई दे सकता है। अगर पेशाब में खून दिखाई दे तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
अगर पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आने के साथ बुखार, ठंड लगना, कमर या पीठ में दर्द, जी मिचलाना या उल्टी जैसी परेशानी भी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि संक्रमण ब्लैडर के साथ-साथ किडनी को भी प्रभावित कर रहा है। किडनी का संक्रमण ज्यादा गंभीर हो सकता है।
महिलाओं में यूटीआई की समस्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलती है। इसकी एक बड़ी वजह शरीर की बनावट है। महिलाओं में पेशाब बाहर निकालने वाली नली छोटी होती है, इसलिए बैक्टीरिया के लिए अंदर जाकर ब्लैडर तक पहुंचना आसान हो जाता है। यौन संबंध के बाद भी कुछ महिलाओं में यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा मेनोपॉज के बाद शरीर में होने वाले हार्मोन बदलावों की वजह से भी संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।
डायबिटीज वाले लोगों और उन लोगों में भी यूटीआई का खतरा ज्यादा हो सकता है, जिनकी शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर है। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक पेशाब रोकता रहता है या किसी वजह से उसका ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, तो भी बैक्टीरिया के बढ़ने का मौका मिलता है।
बचाव के लिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और बार-बार पेशाब होने से पेशाब की नली से कुछ बैक्टीरिया बाहर निकल सकते हैं। पेशाब आने पर उसे बहुत देर तक रोककर नहीं रखना चाहिए। साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है।
--आईएएनएस
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