नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ते तनाव, पीठ दर्द और सांस से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में योग एक बेहतरीन माध्यम है। भारतीय संस्कृति की इस प्राचीन विधा में 'मकरासन' का खास महत्व है। यह आसन थकान मिटाने और शरीर को पूरी तरह आराम देने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।
'मकर' शब्द का संस्कृत में अर्थ 'मगरमच्छ' होता है। इस आसन में शरीर की स्थिति पानी में विश्राम कर रहे मगरमच्छ के समान प्रतीत होती है, इसलिए इसे 'मकरासन' कहा जाता है। यह आसन तनाव को दूर कर पाचन को बेहतर बनाता है और अस्थमा, ग्रीवा संबंधी तकलीफ और साइटिका के दर्द से भी राहत देता है।
हठयोग की परंपरा में 'मकरासन' को एक अत्यंत प्रभावी आसन माना गया है, जहां योग के अधिकांश आसन शरीर में शक्ति, लचीलेपन और संतुलन का निर्माण करते हैं, वहीं मकरासन शरीर और मन दोनों को गहरे विश्राम की स्थिति में ले जाने का कार्य करता है।
इस आसन को नियमित रूप से करना रीढ़ की हड्डी के लिए बेहद लाभकारी होता है। यह रीढ़ की हड्डी की संरचना को संतुलित बनाए रखने में मदद करता और उसमें लचीलापन बढ़ाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो पीठ दर्द, स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
इसके अलावा, मकरासन मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होता है। इस आसन के अभ्यास से मस्तिष्क को शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, मकरासन पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है। इस आसन को करते समय शरीर पेट के बल जमीन पर लेटा होता है, जिससे पेट पर हल्का दबाव पड़ता है। यह दबाव पाचन अंगों को सक्रिय करता है। इस आसन को करते वक्त जब गहरी और धीमी सांस लेते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
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