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शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है अर्द्धहलासन, जानें करने का सही तरीका

शरीर

नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। योग हमारी प्राचीन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो न सिर्फ शरीर को बल्कि स्वस्थ रखने के साथ मन को भी शांत रखने में कारगर होता है। योग के विभिन्न आसनों में 'अर्द्धहलासन' शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

'अर्द्धहलासन' एक संस्कृत शब्द से बना है, जिसमें 'अर्द्ध' का अर्थ 'आधा' और 'हल' का मतलब 'खेत जोतने वाला'। यह आसन हलासन का आधा रूप है, जिसमें पैर के अंगूठे सिर के पीछे जमीन को छूते हैं लेकिन अर्द्धहलासन में आपको सिर्फ पीठ के बल सीधे लेटकर अपने दोनों पैरों को जमीन से 90 डिग्री ऊपर उठाना होता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्द्धहलासन को नियमित तौर पर करने से पेट की चर्बी कम होती है, पाचन तंत्र मजबूत होता है, रीढ़ की हड्डी को लचीलापन मिलता है, और रक्त संचार में सुधार होता है। साथ ही, यह तनाव और चिंता की समस्या को दूर करता है। इसके अलावा, पैरों की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है और पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है।

‘अर्द्धहलासन’ को सही तरीके से करने के लिए कुछ चरणों का पालन करना होता है। सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं, दोनों हाथ शरीर के बगल में रखें, और हथेलियां जमीन पर हों। इसके बाद सांस (श्वास) भरते हुए घुटनों को बिना मोड़े धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाएं और जमीन से 90 डिग्री का कोण बनाएं। इस अवस्था में नितंब से कंधे तक शरीर एक सीध में रहेगा। सामान्य रूप से सांस लेते हुए इस अवस्था में 10-30 सेकेंड तक बने रहें। बाद में सांस छोड़ते हुए बिना सिर उठाए धीरे-धीरे पैरों को वापस जमीन पर ले आएं। शवासन में विश्राम करें।

हालांकि, इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां बरतें। अगर आपको पीठ दर्द, गर्भावस्था, हर्निया, या कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो इस आसन को करने से पहले चिकित्सक या योग प्रशिक्षक से सलाह लें।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम