गांधीनगर, 19 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में हर आंगनवाड़ी केंद्र पर महिलाओं के नेतृत्व वाली आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां (एएमसी) बनाई जाएंगी। इसका उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रारंभिक बाल शिक्षा में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है। इसके साथ ही बच्चों और माताओं को मिलने वाली सेवाओं की निगरानी को बेहतर बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' को जमीनी स्तर पर और मजबूत करना है। ये समितियां 0 से 6 साल के बच्चों में कुपोषण और विकास में देरी की समस्या को कम करने के साथ उनके समग्र विकास पर ध्यान देंगी।
अधिकारियों ने बताया, "महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील के मार्गदर्शन में संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) प्रत्येक आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति का गठन करेंगे। समिति की सभी सात सदस्य महिलाएं होंगी। महिला सुपरवाइजर इसकी अध्यक्ष और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सदस्य-सचिव होंगी।"
समिति में एक आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी में पंजीकृत 3 से 6 साल के बच्चों की दो माताएं, स्थानीय स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) या एनजीओ/सीएसओ की एक महिला सदस्य और नजदीकी सरकारी प्राथमिक स्कूल की एक महिला शिक्षक भी शामिल होंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। इसके साथ ही सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में स्थानीय समुदाय की भूमिका बढ़ाई जाएगी।
आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति की बैठक हर दो महीने में एक बार आंगनवाड़ी केंद्र पर होगी। इसमें केंद्र के कामकाज के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और उन्हें समय पर उपलब्ध कराने की समीक्षा की जाएगी।
समिति आंगनवाड़ी भवन, पीने के पानी, शौचालय, रसोई, स्टोरेज, फर्नीचर, उपकरण, शिक्षण सामग्री (टीएलएम), भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं की जांच करेगी। समितियां पूरक पोषण सेवाओं की भी निगरानी करेंगी। इनमें टेक होम राशन (टीएचआर) और गर्म पका हुआ भोजन (एचसीएम) शामिल हैं। इस दौरान भोजन की गुणवत्ता, ताजगी, साफ-सफाई और पोषण मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
समितियां 0 से 6 साल के बच्चों के विकास, 0 से 3 साल के बच्चों के विकास संबंधी पड़ाव, स्वास्थ्य जांच, कुपोषित बच्चों की पहचान, जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भेजने और ऐसे मामलों के फॉलो-अप की भी समीक्षा करेंगी। प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा भी निगरानी का एक प्रमुख क्षेत्र होगा।
समितियां 'आधारशिला' के तहत रोजाना होने वाली प्री-प्राइमरी गतिविधियों, पाठ्यक्रम आधारित गतिविधियों और बाल दिवस की थीम पर होने वाली गतिविधियों की समीक्षा करेंगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि बच्चों के विकास और मासिक गतिविधियों से संबंधित रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जा रहा है या नहीं।
अधिकारियों के मुताबिक, "इस पहल से यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि कोई भी पात्र लाभार्थी आंगनवाड़ी सेवाओं से वंचित न रहे। घर-घर सर्वे और कम्युनिटी मैपिंग के जरिए समितियां गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 0 से 6 साल के बच्चों की पहचान में मदद करेंगी।"
समितियां विशेष जरूरतों वाले बच्चों के पंजीकरण, उपस्थिति और उनके लिए समावेशी सेवाओं की निगरानी भी करेंगी। इसके साथ ही पोषण ट्रैकर पर लाभार्थियों की जानकारी अपडेट रखना भी सुनिश्चित किया जाएगा।
आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां माता-पिता, वॉलंटियर्स, निजी संस्थाओं, कॉरपोरेट संस्थाओं, एनजीओ, सीएसओ और अन्य सामुदायिक समूहों को आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए अपना समय, कौशल और संसाधन देने के लिए भी प्रोत्साहित करेंगी।
खिलौने, कपड़े, गतिविधियों से जुड़ी सामग्री और शैक्षणिक संसाधनों के रूप में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं, पोषण वाटिका या न्यूट्री-गार्डन बनाने और उनकी देखभाल के लिए पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को भी शामिल किया जाएगा।
सात सदस्यीय समिति की बैठक के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित कम से कम चार सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होगी। जहां तक संभव होगा, फैसले आम सहमति से लिए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर बहुमत के आधार पर निर्णय किया जाएगा। बैठक में उपस्थिति, चर्चा, फैसले और उन पर की गई कार्रवाई का विवरण तय प्रारूप में दर्ज किया जाएगा। इसे सात दिनों के भीतर संबंधित सीडीपीओ को सौंपना होगा।
सीडीपीओ साल में कम से कम दो बार प्रत्येक समिति के कामकाज की समीक्षा करेंगे। स्थानीय स्तर पर हल नहीं हो पाने वाले बड़े मुद्दों को कार्यक्रम अधिकारी और सीडीपीओ के पास भेजा जाएगा।
राज्य सरकार ने कहा कि इस व्यवस्था से माताओं, आशा कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों और समुदाय के अन्य प्रतिनिधियों को आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण, बच्चों के विकास, प्रारंभिक शिक्षा, साफ-सफाई, बुनियादी सुविधाओं, लाभार्थियों को मिलने वाली सेवाओं और शिकायतों के समाधान की नियमित समीक्षा में शामिल किया जा सकेगा।
यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब केंद्र सरकार भी प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा और पोषण सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। जुलाई 2026 में दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' के रूप में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई थी।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम





