Advertisement banner

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने मुजफ्फरपुर के कैंसर अस्पताल में 12 बेड वाले आईसीयू का उद्घाटन किया

बिहार

पटना, 3 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर का दौरा किया और श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) परिसर में स्थित होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (एचबीसीएचएंडआरसी) में अत्याधुनिक 12-बेड वाले इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का उद्घाटन किया।

मंत्री ने रिबन काटकर इस सुविधा का उद्घाटन किया और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) वार्ड में 30 बिस्तरों वाले नए सुपर-स्पेशियलिटी आईसीयू की भी घोषणा की।

मंत्री के दौरे के दौरान अस्पताल परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उद्घाटन के बाद, निशांत कुमार ने कैंसर अस्पताल के विभिन्न विभागों का बारीकी से निरीक्षण किया।

उन्होंने मरीजों के लिए दवाओं, जांच सुविधाओं, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और डॉक्टरों की उपलब्धता की समीक्षा की। मंत्री ने चिकित्सा और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए और जोर दिया कि मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए निशांत कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में मुजफ्फरपुर कैंसर अस्पताल को आधुनिक तकनीक और व्यापक इलाज सुविधाओं के साथ और बेहतर बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर बिहार में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पटना या राज्य के बाहर न जाना पड़े।

उन्होंने कहा कि मरीजों को घर के पास ही अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार पूरे बिहार में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है ताकि हर नागरिक को समय पर चिकित्सा सलाह और अच्छा इलाज मिल सके।

बिहार सरकार ने बुधवार को 'जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार' अभियान शुरू किया, जिसका मकसद पूरे राज्य में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का जल्द पता लगाना और समय पर इलाज सुनिश्चित करना है।

आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर, एएनएम के साथ मिलकर घर-घर जाकर सर्वे करेंगी, परिवार के फोल्डर और सीबीएसी फॉर्म तैयार करेंगी, ज्यादा जोखिम वाले लोगों की पहचान करेंगी, मरीजों की सूची बनाएंगी और मरीजों को बताई गई दवाएं लेने और फॉलो-अप शेड्यूल का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी