आईसीएमआर ने कैंसर और संक्रमण से बचाव की तीन तकनीकें ट्रांसफर कीं

आईसीएमआर ने कैंसर और संक्रमण से बचाव की तीन तकनीकें ट्रांसफर कीं

नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश की प्रमुख दवा और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को तीन स्वदेशी बायोमेडिकल तकनीकों के विकास, निर्माण और व्यावसायिक उपयोग (कमर्शियलाइज़ेशन) के लिए लाइसेंस दिया है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बयान में कहा कि इन तकनीकों का हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) सरकारी फंड से हुई रिसर्च को किफायती स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भारत के बायोमेडिकल नवाचार (इनोवेशन) तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।

इन तकनीकों में 'शेटा-2' भी शामिल है। यह गर्भाशय ग्रीवा की पूर्व-कैंसर अवस्था (सीआईएन) के इलाज के लिए विकसित मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) रोधी नई दवा है। इसके विकास और निर्माण का लाइसेंस एमक्योर फ़ार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को दिया गया है।

आईसीएमआर–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (आईसीएमआर-एनआईआरबीआई), कोलकाता में विकसित आंतों के बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों के खिलाफ अगली पीढ़ी की दो वैक्सीन तकनीकों का लाइसेंस भी बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को दिया गया।

शेटा-2 को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईसीपीआर) के डॉ. शौकत हुसैन ने अमेरिका के ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय के स्टीफेंसन कैंसर केंद्र की डॉ. डोरिस एम. बेनब्रुक के सहयोग से विकसित किया है।

यह अपनी तरह की पहली लक्षित उपचार दवा है, जो स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से होने वाली गर्भाशय ग्रीवा की कैंसर-पूर्व और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को चुनकर नष्ट करती है।

बयान में कहा गया है कि यह तकनीक गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए सुरक्षित, किफायती और कम सर्जरी वाले इलाज का विकल्प बन सकती है।

टीम ने जिन वैक्सीन तकनीकों को विकसित किया है, उनमें एक फ्यूजन तकनीक भी शामिल है। इसमें साल्मोनेला टाइफी जीवाणु का बाहरी झिल्ली प्रोटीन शामिल है। यह टाइफाइड से बचाव के लिए अगली पीढ़ी की एक संभावित वैक्सीन है।

इसमें साल्मोनेला टाइफी, साल्मोनेला पैराटाइफी और शिगेला से होने वाले संक्रमणों के खिलाफ एक पुनःसंयोजित (रिकॉम्बिनेंट) वैक्सीन भी शामिल है। इसे आंतों में संक्रमण फैलाने वाले प्रमुख जीवाणुओं से व्यापक सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है।

बयान में कहा गया है कि ये सभी तकनीकें कैंसर की रोकथाम और संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण की भारत की कोशिशों को मजबूत करेंगी। साथ ही, ये अगली पीढ़ी की स्वदेशी दवाओं और टीकों के विकास को भी बढ़ावा देंगी।

बयान में कहा गया है कि आईसीएमआर ने एक एकीकृत नवाचार तंत्र (इनोवेशन इकोसिस्टम) तैयार किया है, जो स्वास्थ्य तकनीकों के विकास की पूरी प्रक्रिया में मदद करता है। इसमें नई खोज, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, नैदानिक परीक्षण, नियामकीय सहायता और व्यावसायिक उपयोग तक की सभी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम