Advertisement banner

पापोन का नया गाना 'अपनी उलझन' रिलीज, प्यार, जुदाई और खुद को फिर से तलाशने की है कहानी

पापोन

मुंबई, 2 सितंबर (आईएएनएस)। गायक और संगीतकार पापोन का नया गाना 'अपनी उलझन' रिलीज हो गया है। यह गाना प्यार, जुदाई और किसी रिश्ते के खत्म होने के बाद खुद को दोबारा समझने की कोशिश के बारे में है। गाने में उस दौर की भावनाओं को आवाज दी गई है, जब इंसान किसी रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश तो करता है, लेकिन उसके असर से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाता। कई बार इंसान के अंदर होने वाला बदलाव उन लोगों को उसके व्यक्तित्व में बदलाव जैसा लगता है, जो उसे पहले से जानते हैं।

'अपनी उलझन' के बोल गीतकार वैभव मोदी ने लिखे हैं। गाने में एक ऐसे इंसान की कहानी सामने आती है, जो धीरे-धीरे अपनी भावनात्मक उलझनों से बाहर निकल रहा है और खुद के अंदर एक संतुलन तलाशने की कोशिश कर रहा है। गाने की सबसे खास बात यह है कि इसमें आगे बढ़ने की कोशिश के साथ-साथ उस रिश्ते की याद और उसका असर भी मौजूद है।

पापोन ने गाने के बारे में बात करते हुए कहा, ''मैं 'अपनी उलझन' के बोल में छिपी भावनाओं से खुद को काफी जुड़ा हुआ महसूस करता हूं। यह गाना जिंदगी के उस दौर के बारे में है, जब इंसान अपनी ही उलझनों से बाहर निकलने की कोशिश करता है और खुद को संभालना सीखता है। यह मेरा एल्बम 'सर-ए-शाम' के पसंदीदा गानों में से एक है।''

पापोन ने आगे कहा, ''इसकी धुन में पारंपरिक अंदाज रखा गया है और संगीत को भी काफी सरल रखा गया है। कई बार किसी इंसान का खुद को संभालना और ठीक होना उन लोगों को बदलाव जैसा नजर आता है, जो उसे पहले से जानते थे। 'अपनी उलझन' इसी भावना को बेहद ईमानदारी से सामने रखता है।''

गाने की कहानी में उस समय को भी महसूस किया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति पुराने रिश्ते को पीछे छोड़कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता है। एक तरफ वह भावनात्मक रूप से उस रिश्ते से जुड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद को फिर से पहचानने और अपनी जिंदगी को नए तरीके से संभालने की कोशिश कर रहा है। गाने में अकेलापन, कमजोरी, खुद को समझने की कोशिश और धीरे-धीरे मजबूत होने का एहसास एक साथ दिखाई देता है।

पापोन लंबे समय से भारतीय संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। उन्होंने साल 1998 में असमिया गाने 'नसाबा सोकुले' से संगीत की दुनिया में कदम रखा था। यह गाना उनके एल्बम 'स्निग्धा जुनक' का हिस्सा था। इसके बाद साल 2004 में उनका पहला एल्बम 'जुनाकी राती' रिलीज हुआ।

बॉलीवुड में पापोन ने साल 2006 में फिल्म 'स्ट्रिंग्स- बाउंड बाय फेथ' के गाने 'ओम मंत्र' से कदम रखा। हालांकि उन्हें बड़ी पहचान साल 2011 में फिल्म 'दम मारो दम' के गाने 'जिएं क्यों' से मिली। इसके बाद उन्होंने कई यादगार गानों को अपनी आवाज दी। साल 2014 में उन्होंने फिल्म 'क्या दिल्ली क्या लाहौर' के लिए गुलजार की कविता 'लकीरें' गाई। इसी साल वह फिल्म 'लक्ष्मी' के गाने 'सुन री बावली' में भी अपनी आवाज दे चुके हैं।

साल 2015 में फिल्म 'दम लगा के हईशा' का गाना 'मोह मोह के धागे' पापोन की आवाज में काफी पसंद किया गया। इसके बाद उन्होंने 'हमारी अधूरी कहानी' के लिए 'हमनवा' और सलमान खान की फिल्म 'सुल्तान' का गाना 'बुल्लेया' भी गाया।

--आईएएनएस

पीके/एएस