Advertisement banner

हिप-हॉप और कमर्शियल के बीच की लाइन काफी अब धुंधली हो गई है: एमसी स्क्वायर

हिप-हॉप

मुंबई, 22 अगस्त (आईएएनएस)। मशहूर रैपर एमसी स्क्वायर इन दिनों रैप शो 'हसल सीजन 5' में मेंटर के तौर पर नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि मेनस्ट्रीम और अंडरग्राउंड म्यूजिक (मुख्यधारा से हटकर) के बीच की लाइन अब धुंधली हो गई है और अब दर्शक हर तरह के म्यूजिक को पसंद कर रहे हैं।

एमसी स्क्वायर ने बताया कि किसी गाने को उसकी लोकप्रियता या कमाई के आधार पर कमर्शियल नहीं कहा जा सकता क्योंकि अब अंडरग्राउंड म्यूजिक ही मेनस्ट्रीम बन गया है।

जब एमसी स्क्वायर से पूछा गया किय क्या 'एमटीवी हसल' अभी भी एक खास वर्ग के लिए है, क्योंकि ज्यादातर लोग हिप-हॉप से ज्यादा कमर्शियल म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं। एमसी स्क्वायर ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, "मुझे लगता है कि कला एक ऐसी चीज है, जो अगर चार पैसे कमा ले तो उसे कमर्शियल कह दिया जाता है। मैं कमर्शियल की इस परिभाषा को नहीं मानता कि किसी खास तरह का म्यूजिक कमर्शियल है।"

एमसी स्क्वायर ने आगे कहा, "आजकल आपने देखा होगा कि अंडरग्राउंड म्यूजिक भी मेनस्ट्रीम म्यूजिक बन गया है। हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं। हमारे खुद के गानों में भी ऐसे कई उदाहरण हैं। तो ऐसा कुछ नहीं है कि ये किसी खास ऑडियंस के लिए है। जो गाने सुनना पसंद करते हैं, वो ये शो भी देखते हैं। और आपको दूसरे तरह के गाने सुनने को भी मिलते हैं।"

उन्होंने कहा, "आपको कई बातें सुनने को मिलती हैं, कुछ अच्छी होती हैं, तो कुछ से सीखने को मिलता है और यह सभी के लिए होता है न की किसी खास वर्ग के लिए।"

प्रसिद्ध भारतीय रैपर, गीतकार और हिप-हॉप कलाकार एमसी स्क्वायर, जिनका असली नाम अभिषेक बैंसला है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत एमटीवी के लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो 'हसल 2.0' से की थी और उस साल की ट्रॉफी अपने नाम भी की थी।

उनके गानों और रैप में शहरी हिप-हॉप के साथ-साथ पारंपरिक हरियाणवी लोक संगीत, रागिनी और अपनी स्थानीय संस्कृति का अनूठा मिश्रण होता है।

--आईएएनएस

एनएस/डीएसस