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स्मार्टफोन अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सरकार को मोबाइल फोन पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत करना चाहिए: उद्योग संगठन

मोबाइल पर जीएसटी घटाकर 5% करने की मांग
स्मार्टफोन

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने सोमवार को सरकार से मोबाइल फोन पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की। उद्योग संगठन ने कहा कि इस प्रस्ताव को जीएसटी परिषद की अगली बैठक में रखा जाना चाहिए ताकि स्मार्टफोन को अधिक किफायती बनाया जा सके।

उद्योग जगत के संगठन ने एक बयान में कहा कि देश में अभी भी करीब 25 करोड़ लोग फीचर फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्मार्टफोन की ऊंची कीमतें कम आय वाले और ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी बाधा बनी हुई हैं। ऐसे में जीएसटी दर कम करने से स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ेगी और अधिक लोग डिजिटल सेवाओं से जुड़ सकेंगे।

आईसीईए ने कहा कि आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ संचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बैंकिंग और संचार का प्रमुख माध्यम बन चुका है। इसलिए स्मार्टफोन को अधिक सुलभ और किफायती बनाना सीधे तौर पर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने से जुड़ा हुआ है।

उद्योग संगठन ने बताया कि भारत में मोबाइल फोन निर्माण वित्त वर्ष 2014-15 के 18,900 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसी अवधि में मोबाइल फोन निर्यात 1,566 करोड़ रुपए से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपए हो गया है। भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है और वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा।

हालांकि, संगठन का कहना है कि विनिर्माण और निर्यात में हुई इस प्रगति के मुकाबले घरेलू मांग उतनी तेजी से नहीं बढ़ी है। हैंडसेट की खपत कमजोर हुई है, मोबाइल बदलने का चक्र लंबा हो गया है और एंट्री-लेवल स्मार्टफोन सेगमेंट दबाव में है।

आईसीईए ने कहा कि यदि घरेलू बाजार में मांग नहीं बढ़ी, तो विनिर्माण क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसलिए भारत को अपने घरेलू बाजार में फिर से मांग को गति देने की आवश्यकता है।

उद्योग संगठन का मानना है कि जीएसटी दर कम करने से स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत घटेगी, पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक लोग औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे।

आईसीईए ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डेटा सेंटरों की मजबूत मांग के कारण वैश्विक स्तर पर मोबाइल डीआरएएम और नैंड फ्लैश मेमोरी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे मोबाइल फोन निर्माण लागत में वृद्धि हुई है। निर्माता इस अतिरिक्त लागत का केवल एक हिस्सा ही अपने स्तर पर वहन कर पा रहे हैं।

उद्योग जगत के संगठन ने याद दिलाया कि उसने वर्ष 2025 में जीएसटी ढांचे की समीक्षा के दौरान भी मोबाइल फोन पर जीएसटी घटाने की वकालत की थी। उस समय कई उपभोक्ता श्रेणियों में कर दरों को कम किया गया था ताकि खपत और वहनीयता को बढ़ावा मिल सके।

आईसीईए के अनुसार, बड़ा घरेलू बाजार मोबाइल फोन की बिक्री बढ़ाएगा, औपचारिक बाजार को मजबूत करेगा, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग में मदद करेगा और भारत के मोबाइल फोन एवं कंपोनेंट विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में नए निवेश को प्रोत्साहित करेगा।

--आईएएनएस

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