नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को कहा कि उसने अपने सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के अपरेटेड थ्रस्ट (बढ़ी हुई क्षमता) पर 'फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट' सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह आने वाले एलवीएम3 मिशन की दिशा में एक और कदम है।
स्पेस एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में बताया कि यह टेस्ट तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में किया गया।
टेस्ट किया गया सीई20 इंजन आने वाले एलवीएम3 मिशन के सी32 अपर स्टेज (ऊपरी हिस्से) के लिए तय किया गया है। 220 केएन पर किया गया यह टेस्ट क्रायोजेनिक इंजन की बढ़ी हुई थ्रस्ट क्षमता को दिखाता है और इसका मकसद उड़ान से पहले इसके परफॉर्मेंस को वेरिफाई करना है।
इसरो ने कहा, "आने वाले एलवीएम3 मिशन के सी32 अपर स्टेज के लिए तय सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के ऑपरेटेड थ्रस्ट पर 'फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट' 9 सितंबर को इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स, महेंद्रगिरि में सफलतापूर्वक किया गया।"
इसरो ने कहा, "इस टेस्ट में गगनयान मिशन के सी32 स्टेज के लिए बने एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (एलटीपीएम) के परफॉर्मेंस का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।"
इसी टेस्ट के दौरान इसरो ने एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (एलटीपीएम) के परफॉर्मेंस का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिसे गगनयान मिशन के सी32 स्टेज के लिए डिजाइन किया गया है।
यह सफल हॉट टेस्ट ऐसे समय में हुआ है जब इसरो भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एडवांस्ड प्रोपल्शन और लॉन्च सिस्टम विकसित और क्वालिफाई कर रहा है। एलवीएम3 देश के भारी मिशनों के लिए एक मुख्य लॉन्च व्हीकल बना हुआ है और भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान के लक्ष्यों के लिए भी अहम है।
स्पेस एजेंसी भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं के बड़े विस्तार पर काम कर रही है, जिसमें अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम, मानव अंतरिक्ष उड़ान, चंद्रमा और ग्रहों की खोज और प्रस्तावित 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' पर ध्यान दिया जा रहा है।
इसरो ने कहा है कि भारत के स्पेस-सेक्टर में सुधारों का मकसद एक बड़ा नेशनल स्पेस इकोसिस्टम बनाना है, जिसमें प्राइवेट इंडस्ट्री, स्टार्टअप और एकेडेमिया एजेंसी के काम में मदद करें जबकि इसरो एडवांस्ड रिसर्च, नई टेक्नोलॉजी और मुश्किल नेशनल मिशन पर ज्यादा ध्यान दे।
--आईएएनएस
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