नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजेडी) के नेता संतृप्त मिश्रा ने शनिवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और साइबर सुरक्षा के लिए फंडिंग के दूसरे तरीकों पर विचार करे। साथ ही, छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
शुक्रवार को ओडिशा में विपक्ष के नेता (एलओपी) और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भी 2 हजार रुपए से ज्यादा के कुछ यूपीआई ट्रांजैक्शन पर हाल ही में घोषित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि आम लोगों और दुकानदारों जैसे छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए संतृप्त मिश्रा ने माना कि यूपीआई एक बहुत ही 'महत्वपूर्ण इनोवेशन' है।
बीजेडी नेता ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि साइबर सिक्योरिटी बनाने और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाने के लिए फंडिंग की जरूरत है, बल्कि सवाल यह है कि इसके लिए फंडिंग कैसे होगी? इसका खर्च कौन उठाएगा? और हम यह कैसे पक्का करेंगे कि इस प्रोसेस में लगातार निवेश होता रहे?
मिश्रा ने जोर देते हुए कहा कि बीजेडी का रुख यह है कि कंज्यूमर्स और छोटे व्यवसायों को सुरक्षा मिलनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के लिए फंड जुटाने के कई और तरीके हो सकते हैं। हमें उन सभी पर विचार करना चाहिए, न कि छोटे व्यवसायों पर और अधिक शुल्क का बोझ डालना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पोस्ट के बारे में, जिसमें कहा गया था कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित 'यूपीआई टैक्स प्रस्ताव' पर चर्चा नहीं की है, बीजेडी नेता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
हालांकि, संतृप्त मिश्रा ने संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि क्या समिति ने यूपीआई से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की है या नहीं और चर्चा का स्वरूप क्या था?
इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय समितियों के कामकाज को जनहित के मामलों में अधिक पारदर्शी होने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने की जरूरत है कि किसी खास मामले पर असल में क्या चर्चा हुई और अगर कोई रचनात्मक सुझाव थे, तो उन्हें क्यों नहीं माना गया?
इस बीच, ओडिशा कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की और यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर की तुलना ऐतिहासिक 'जजिया कर' से की।
--आईएएनएस
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