नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से घरेलू रसोई गैस कनेक्शंस को एलपीजी (एलपीजी) से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर तेजी से स्विच कराने के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक सहयोग देने को कहा है। सरकार का कहना है कि पीएनजी एक सुरक्षित खाना पकाने वाला ईंधन है और इससे तेल कंपनियों पर लॉजिस्टिक्स का बोझ भी कम होता है।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में उन क्षेत्रों में जिला स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है, जहां पाइपलाइन गैस उपलब्ध है। इसका उद्देश्य ऐसे नियामकीय ढांचे को लागू करना है, जिसके तहत घरों में एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखने की व्यवस्था को रोका जा सके।
पेट्रोलियम सचिव ने पत्र में कहा, “पीएनजी एक अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और कुशल खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराती है। यह देश के एनर्जी ट्रांजिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका तेजी से इस्तेमाल एलपीजी वितरण से जुड़े लॉजिस्टिक्स के बोझ को कम करने, उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ाने और बड़े सार्वजनिक एवं निजी निवेश से तैयार किए गए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग में मदद करता है।”
सरकार पहले से ही उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान उस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे भारत के करीब 50 प्रतिशत एलपीजी आयात होकर आते थे। इसके कारण एलपीजी की सप्लाई चेन में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई थी।
सरकार ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन का रेगुलेशन) संशोधन आदेश, 2026 भी अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य पीएनजी कनेक्शन अपनाने वाले घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत और सुविधा देना है।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान करीब 7.99 लाख पीएनजी कनेक्शनों को गैसीफाई किया गया, जबकि अतिरिक्त 2.87 लाख कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। इससे कुल क्षमता 10.86 लाख कनेक्शन तक पहुंच गई।
अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अधिकृत सिटी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) गठित करने का निर्देश दिया है।
ये समितियां पात्र हाउसिंग सोसाइटियों और घरों की पहचान करेंगी, हाउसिंग सोसाइटियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को वैधानिक नोटिस जारी करेंगी तथा पीएनजी कनेक्शन को तेजी से बढ़ावा देने के लिए जागरूकता शिविर आयोजित करेंगी।
मंत्रालय ने कहा कि पीसीसी व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन अब तक के अनुभव से पता चलता है कि तय समयसीमा में एलपीजी से पीएनजी पर बदलाव लागू करने के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
जिला प्रशासन से उम्मीद की जाएगी कि वह आरडब्ल्यूए और हाउसिंग सोसाइटियों से राइट ऑफ वे (मार्ग के अधिकार) या राइट ऑफ यूज (उपयोग के अधिकार) हासिल करने में मदद करेगा। साथ ही, एलपीजी वितरकों और सीजीडी कंपनियों के बीच ट्रांजिशन को आसान बनाने, उपभोक्ताओं तक पहुंच और सत्यापन में सहयोग करने तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में भी मदद करेगा।
इसके अलावा, जिला प्रशासन अधिसूचित क्षेत्रों में पीएनजी अपनाने की निगरानी करेगा। जहां आवश्यक हो, वहां गैर-सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रवेश से इनकार किए जाने पर संबंधित अधिकारियों को नियंत्रण आदेशों के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी यह सहयोग देने के लिए सबसे उपयुक्त हैं, क्योंकि एलपीजी वितरकों के साथ उनका पहले से नियामकीय संपर्क है और जमीनी स्तर पर उनका प्रशासनिक नेटवर्क भी मौजूद है।
राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी को नामित करें। यह अधिकारी स्थानीय पीसीसी के साथ औपचारिक रूप से जुड़ा रहेगा।
मंत्रालय ने राज्यों से इस मामले को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है और कहा है कि सरकार समयबद्ध तरीके से पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
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