नई दिल्ली, 16 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में कृषि क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण में बीते एक दशक में तेज बढ़ोतरी हुई है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32.50 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो कि वित्त वर्ष 2014-15 के 8 लाख करोड़ रुपए से चार गुना से अधिक है। यह जानकारी सरकार द्वारा गुरुवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।
फैक्टशीट के मुताबिक, ग्रामीण ऋण इकोसिस्टम वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2023-24 के बीच करीब 13 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ा है।
कृषि में जमीनी स्तर पर ऋण को बढ़ावा देने के लिए नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) बैंकों को कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म लोन देने के लिए उनके संसाधनों को बढ़ाने के मकसद से रीफाइनेंस सपोर्ट देता है।
फैक्टशीट में बताया गया कि औपचारिक ग्रामीण वित्त की बढ़ती पहुंच की झलक नाबार्ड के ग्रामीण आर्थिक स्थिति एवं भावना सर्वेक्षण (मई 2026) में भी देखने को मिलता है। सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 77.2 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने अपने उपभोग स्तर में वृद्धि की जानकारी दी, जो बढ़ती क्रय शक्ति और लगातार बनी हुई मांग को दर्शाता है। औपचारिक ऋण तक पहुंच में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। लगभग 51 प्रतिशत परिवार केवल औपचारिक स्रोतों से ऋण प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 27 प्रतिशत से अधिक परिवार संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों माध्यमों से ऋण ले रहे हैं।
वर्ष 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों में 41,464 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक शाखाएं थीं। जुलाई 2025 तक इनकी संख्या 35 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 56,193 हो गई, जिससे ग्रामीण ऋण वितरण को महत्वपूर्ण मजबूती मिली। इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हैं, जिनका 700 जिलों में 22,000 से अधिक शाखाओं का नेटवर्क है।
सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों ने भी दूरदराज के क्षेत्रों में गरीबों के बीच बैंकिंग की आदतों को बढ़ावा देकर संस्थागत ऋण के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आरबीआई और नाबार्ड के अनुसार, सहकारी बैंकिंग नेटवर्क में 1,458 शहरी सहकारी बैंक, 34 राज्य सहकारी बैंक और 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त सरकार का विशेष ध्यान गरीबों के लिए संचालित गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों पर भी है, जैसे दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन। यह योजना ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करती है और उनकी आय बढ़ाने तथा जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायता करती है।
यह कार्यक्रम पूरे देश में लागू किया जा रहा है। 10 जुलाई 2026 तक 19.83 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय थे और योजना की शुरुआत से अब तक इनके माध्यम से 13.28 लाख करोड़ रुपए के ऋण का वितरण किया जा चुका है।
फरवरी 2026 तक 50,548 'बैंक सखी' तैनात की जा चुकी थीं, जिन्होंने 2013-14 से अब तक स्वयं सहायता समूहों को 12.18 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बैंक ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग दिया है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना भी वंचित समुदायों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 24 जून 2026 तक 58.63 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके थे, जिनमें 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि थी। इनमें से 32.68 करोड़ खाते (55.7 प्रतिशत) महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि 45.62 करोड़ खाते (77.8 प्रतिशत) ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं।
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