नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का अकाउंट एग्रीगेटर (एए) इकोसिस्टम वित्तीय क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था के जरिए अनुमानित 3.82 लाख करोड़ रुपए के लोन का वितरण हुआ। यह राशि कुल 3.68 करोड़ कर्जों के माध्यम से वितरित की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारत की रिटेल और एमएसएमई लेंडिंग में अकाउंट एग्रीगेटर की हिस्सेदारी मूल्य के हिसाब से 8.4 प्रतिशत और लोन की संख्या के हिसाब से 11.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
आरबीआई से मान्यता प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम की सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (एसआरओ) सहमति की रिपोर्ट के अनुसार, एए के जरिए होम लोन और प्रॉपर्टी के बदले मिलने वाले लोन में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में एए-सक्षम होम लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के तहत 1.09 लाख लोन दिए गए, जिनकी कुल राशि 20,777 करोड़ रुपए रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 624 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अकाउंट एग्रीगेटर की पहुंच अब केवल बिना गारंटी वाले रिटेल लोन तक सीमित नहीं रही है। इसका इस्तेमाल सुरक्षित कर्ज यानी सिक्योर्ड क्रेडिट के लिए भी तेजी से बढ़ रहा है और इसमें बैंकों की भागीदारी भी मजबूत हो रही है।
मुख्यधारा के वित्तीय संस्थानों द्वारा इस व्यवस्था को अपनाने के कारण इसका विस्तार और तेज हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में एए के जरिए दिए गए कुल लोन में मूल्य के हिसाब से बैंकों की हिस्सेदारी 47.3 प्रतिशत रही, जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी के लगभग बराबर पहुंच गई।
रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्लेटफॉर्म से जुड़े संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार, लोन लेने वाले ऐसे लोग जिनका पहले कोई औपचारिक क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं था, यानी न्यू-टू-क्रेडिट बॉरोअर्स, एए के जरिए हुए कुल लोन वितरण में संख्या के हिसाब से 18.2 प्रतिशत रहे। वहीं, महिला उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी लोन की संख्या में 19.8 प्रतिशत और वितरित राशि में 19.1 प्रतिशत रही।
सहमति की मुख्य नीति और एडवोकेसी अधिकारी शालिनी गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे अधिक वित्तीय सूचना स्रोत इस व्यवस्था से जुड़ेंगे, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क कर्ज देने की प्रक्रिया को तेज, अधिक समावेशी और वित्तीय संस्थानों व ग्राहकों दोनों के लिए अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था में ग्राहक की सहमति से उसकी वित्तीय जानकारी को सुरक्षित तरीके से साझा किया जाता है, जिससे बैंकों और अन्य कर्जदाताओं को उधारकर्ता की वित्तीय स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में जीएसटी, सीबीडीटी और ईपीएफओ जैसे वित्तीय और आय से जुड़े सूचना स्रोतों के अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम से जुड़ने से इसकी क्षमता और बढ़ सकती है। इससे कैश फ्लो यानी नियमित आय और नकदी प्रवाह के आधार पर कर्ज देने की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
साथ ही रिटेल, एमएसएमई और सिक्योर्ड लेंडिंग के क्षेत्र में नए अवसर खुल सकते हैं और भारत के अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम के विस्तार का अगला चरण और तेज हो सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी







