अमेरिका के टैरिफ प्लान का भारतीय फार्मा कंपनियों पर सीमित प्रभाव : रिपोर्ट

अमेरिका के टैरिफ प्लान का भारतीय फार्मा कंपनियों पर सीमित प्रभाव : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ का ऐलान किया। हालांकि, अमेरिका में आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ लगाने की घोषणा का भारतीय दवा कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल पर अगले दो वित्तीय वर्षों में सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना है।

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका भारतीय दवा कंपनियों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका ने भारत से 9.47 अरब डॉलर मूल्य के फार्मास्यूटिकल उत्पाद आयात किए, जो भारत के कुल फार्मा निर्यात का लगभग 30 फीसदी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ लागू होने से पहले दिया गया ट्रांजिशन पीरियड भारतीय फार्मा कंपनियों को अपनी कारोबारी रणनीति में बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय देगा। इससे निकट भविष्य में उनकी वित्तीय स्थिति और क्रेडिट प्रोफाइल पर प्रभाव सीमित रहेगा।

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ रेटिंग्स ऑफिसर रोहित इनामदार ने कहा, "उत्पादन आधार को अमेरिका में स्थानांतरित करना आसान नहीं होगा। सप्लाई चेन की जटिलताएं, नियामकीय मंजूरियां, शुरुआती पूंजी निवेश (कैपेक्स) और लागत-लाभ का समीकरण जैसी कई चुनौतियां सामने आएंगी।"

उन्होंने कहा कि दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले की-स्टार्टिंग मटेरियल (केएसएम) और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) का उत्पादन मुख्य रूप से भारत और चीन में स्थापित सप्लाई चेन के जरिए होता है, जिसे अमेरिका में दोहराना आसान नहीं होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियां इस समय अमेरिका में दी जाने वाली करीब 47 फीसदी जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करती हैं। वहीं, अमेरिका में कुल जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी लगभग 90 फीसदी है। हालांकि, इन पर कुल प्रिस्क्रिप्शन दवा खर्च का केवल 13 फीसदी ही होता है।

इन्फोमेरिक्स ने 25 प्रमुख सूचीबद्ध फार्मा कंपनियों के विश्लेषण में पाया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उनका ईबीआईटीडीए मार्जिन 26.1 फीसदी रहा। हालांकि यह वित्त वर्ष 2024-25 के 28.3 फीसदी से कुछ कम है।

इस दौरान कंपनियों की आय में लगभग 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कर्ज चुकाने की क्षमता भी मजबूत बनी रही। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय दवा कंपनियों ने धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार घरेलू बाजार, यूरोप और दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राजील तथा रूस जैसे उभरते बाजारों में किया है। इससे अमेरिकी बाजार पर उनकी निर्भरता कम हुई है।

सात प्रमुख भारतीय फार्मा कंपनियों के कुल कारोबार में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2024-25 के 36.8 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 33.4 फीसदी रह गई।

हालांकि, जिन कंपनियों की अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भरता है, जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, अरबिंदो फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज और ल्यूपिन, उन्हें अपेक्षाकृत अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उनकी 35 से 50 फीसदी आय अमेरिका से आती है।

हाल ही में घोषित टैरिफ योजना के तहत 31 जुलाई 2028 तक अमेरिका में आयातित जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसके बाद 1 अगस्त 2028 से एक वर्ष के लिए 100 फीसदी टैरिफ लागू होगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाएगा। यदि कंपनियां अमेरिका में ही उत्पादन इकाइयां स्थापित कर लेती हैं, तो वे इस अतिरिक्त टैरिफ से बच सकती हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम