Chandrababu Naidu Controversy : अमरावती सीएम नायडू और उनके सहयोगियों के लिए 'सोने का अंडा देने वाली मुर्गी' बनी : वाईएसआरसीपी

अमरावती को लेकर वाईएसआरसीपी का नायडू पर हमला, राजनीतिक टकराव बढ़ा
अमरावती सीएम नायडू और उनके सहयोगियों के लिए 'सोने का अंडा देने वाली मुर्गी' बनी : वाईएसआरसीपी

अमरावती: आंध्र प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने रविवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर तीखा हमला बोला और उन्हें पार्टी के लिए 'अपमानजनक' शब्दों का इस्तेमाल करने को लेकर आड़े हाथों लिया। विवाद तब बढ़ा जब सीएम नायडू और टीडीपी नेताओं ने वाईएसआरसीपी को 'कुल्हाड़ी पार्टी' करार दिया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री काकानी गोवर्धन रेड्डी ने नेल्लोर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि असल में 'कुल्हाड़ी' नहीं, बल्कि 'कुदाल' (क्रोबार) का प्रतीक खुद चंद्रबाबू नायडू हैं, जो राज्य की संपत्ति को अपने और अपने करीबी लोगों के फायदे के लिए खोद रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरावती सीएम नायडू और उनके सहयोगियों के लिए 'सोने का अंडा देने वाली मुर्गी' बन गई है।

गोवर्धन रेड्डी ने कहा कि एक तरफ सरकार बढ़े हुए ठेकों के जरिए भारी रकम निकाल रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को स्वास्थ्य, शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, महिलाओं, युवाओं और अन्य वर्गों के साथ भी वादाखिलाफी की गई है।

उन्होंने राज्य सरकार पर वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमरावती में निर्माण कार्यों के लिए 20,489 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से भुगतान किया जा रहा है, जो देश में कहीं भी नहीं देखा गया। उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह दर करीब 4,500 रुपये प्रति वर्ग फुट होती है।

पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि ठेके उन्हीं लोगों को दिए गए, जिन्हें नायडू के पिछले कार्यकाल में भी काम मिला था, और इनकी दरों को सुनियोजित तरीके से कई गुना बढ़ाया गया। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना सचिवालय और संसद भवन जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी इस खर्च के मुकाबले बहुत कम लागत में बने हैं, जो कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

गोवर्धन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू के राजनीतिक सफर पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने टीडीपी और मुख्यमंत्री पद पार्टी संस्थापक एनटीआर से छीना था, और तब से ही वे अपने राजनीतिक हितों के लिए रंग बदलते रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नेल्लोर में आयोजित 'महानाडु' का आगामी चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि जनता ने वाईएसआरसीपी को फिर से जीत दिलाने का मन बना लिया है। लोग अब समझ चुके हैं कि उनके साथ फिर धोखा हुआ है और चंद्रबाबू नायडू अपने वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं।

--आईएएनएस

 

 

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