Warangal Temple Controversy : तेलंगाना के अधिकारियों ने वारंगल में प्राचीन मंदिर को गिराए जाने की खबरों से किया इनकार

वारंगल में मंदिर ध्वस्तीकरण के दावों पर प्रशासन का खंडन, पुनर्स्थापन का आश्वासन
तेलंगाना के अधिकारियों ने वारंगल में प्राचीन मंदिर को गिराए जाने की खबरों से किया इनकार

हैदराबाद: तेलंगाना के वारंगल जिले के अधिकारियों ने शुक्रवार को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए उन दावों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि एक सरकारी स्कूल के निर्माण कार्य के दौरान एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया।

वारंगल कलेक्टर ऑफिस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 6 मई को खानापुर मंडल के पहाड़ला अशोकनगर गांव में मंदिर के कथित विध्वंस की खबरें गलत हैं और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

बयान के अनुसार, 6 मई को राजस्व विभाग, पुरातत्व विभाग, खानापुर तहसीलदार, तेलंगाना स्टेट एजुकेशन एंड वेलफेयर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेश्न (टीजीईडब्ल्यूआईडीसी) और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की संयुक्त जांच की गई।

जांच में पाया गया कि 30 एकड़ भूमि घनी झाड़ियों और पेड़ों से ढकी हुई थी। प्रस्तावित “यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल कॉम्प्लेक्स” के लिए सफाई और समतलीकरण के दौरान वहां एक पुरानी और जर्जर संरचना के अवशेष मिले। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का विध्वंस या तोड़फोड़ निर्माण एजेंसी द्वारा नहीं किया गया।

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह सरकारी भूमि है न कि देवस्थान (एंडोमेंट) भूमि और पहले ही इसे जनजातीय कल्याण विभाग को आवंटित किया जा चुका था।

पुरातत्व विभाग ने भी पुष्टि की कि यह संरचना किसी संरक्षित स्मारक या पुरातात्विक स्थल के रूप में दर्ज नहीं है। जांच टीम ने पाया कि यह ढांचा लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और उपयोग में नहीं था।

सत्य शारदा और डी माधव रेड्डी ने गुरुवार को स्थल का दौरा किया और आश्वासन दिया कि इस संरचना को इतिहासकारों, स्थापतियों और पुरातत्व विभाग के परामर्श से उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाएगा। साथ ही इसे पुरातत्व विभाग में अधिसूचित कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब विपक्षी दल बीआरएस और बीजेपी ने कथित विध्वंस को लेकर आपत्ति जताई और तत्काल पुनर्स्थापन की मांग की थी।

--आईएएनएस

 

 

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