Vikram Samvat 2083 : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नव संवत्सर की दी शुभकामनाएं, गौ रक्षा का किया आह्वान

काशी में वैदिक अनुष्ठानों के साथ नव संवत्सर 2083 का भव्य स्वागत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नव संवत्सर की दी शुभकामनाएं, गौ रक्षा का किया आह्वान

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इस बार भारतीय नव वर्ष यानी विक्रम संवत 2083 का स्वागत बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस मौके पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'सनातन पंचांग' का उद्घाटन किया और सभी देशवासियों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं।

इस दौरान काशी के शंकराचार्य घाट पर सुबह-सुबह वैदिक मंत्रों के साथ उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर नए साल का स्वागत किया गया, जो अपने आप में एक बहुत ही आध्यात्मिक और सकारात्मक शुरुआत मानी जाती है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह नया साल 'रौद्र' नाम का संवत्सर है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस संवत्सर में शासक वर्ग, यानी राजा, कुछ कठोर या निष्ठुर हो सकते हैं। इसके साथ ही एक बहुत अच्छी बात भी है। इस साल का राजा 'गुरु' है, क्योंकि वर्ष की शुरुआत गुरुवार से हुई है। शास्त्रों में माना जाता है कि जब वर्ष का राजा गुरु होता है तो वर्षा अच्छी होती है, पशु-पक्षी, खासकर गायें, खुश रहती हैं और समाज में धार्मिक कार्य बढ़ते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस साल लोगों में उत्सव का माहौल रहेगा। यानी भले ही कुछ कठिन परिस्थितियां आएं, लेकिन आम जनता संघर्ष करते हुए अंत में खुशहाल और विजयी होगी। यह एक तरह से उम्मीद और सकारात्मकता का संदेश है कि कठिनाइयों के बावजूद समाज आगे बढ़ेगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक और खास बात कही कि इस संवत्सर को उन्होंने 'गविष्ठी संवत्सर' घोषित किया है। इसका मतलब है कि इस साल खास तौर पर गौ माता की रक्षा के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक संकल्प नहीं बल्कि एक लक्ष्य है, जिसे इस साल पूरा करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि पहले लिए गए कई संकल्प, जैसे गंगा और गायों की रक्षा काफी हद तक सफल रहे हैं, इसलिए अब और मजबूती के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

--आईएएनएस

 

 

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