वर्कला: नेमोम में हुए हाई-प्रोफाइल मुकाबले के बाद तिरुवनंतपुरम जिले की राजनीतिक निगाहें अब उत्तर की ओर वर्कला सीट पर केंद्रित हो गई हैं। यहां अप्रत्याशित घटनाक्रम ने एक अनुमानित मुकाबले को विधानसभा चुनाव की सबसे चर्चित लड़ाइयों में से एक में बदल दिया है।
दो बार के सीपीआई(एम) विधायक वी. जॉय इस निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पहली बार 2016 में अनुभवी कांग्रेस नेता वर्कला कहार को हराकर यह सीट जीती थी।
2021 में जब कहार की जगह अपेक्षाकृत कम अनुभवी कांग्रेस उम्मीदवार ने दावेदारी की, तब भी जॉय ने सीट बरकरार रखी। इससे क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत नेता के रूप में और हाल ही में सीपीआई(एम) के शक्तिशाली जिला सचिव के रूप में उनकी स्थिति और भी मजबूत हो गई।
हालांकि, कहार की वापसी ने राजनीतिक समीकरणों को काफी हद तक बदल दिया है।
इस निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके और कांग्रेस के अनुभवी प्रचारक कहार अपने साथ अनुभव और मजबूत जनसमर्थन आधार लेकर आए हैं, जिससे जॉय के साथ सीधा और कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
इस चुनावी मुकाबले में एक नया मोड़ भाजपा उम्मीदवार एस. स्मिता की एंट्री से आ गया है, जिनकी उम्मीदवारी ने राजनीतिक जगत में काफी हलचल मचा दी है।
एक ऐसे घटनाक्रम ने जिसने कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों दोनों को चौंका दिया, स्मिता को जॉय के नामांकन दाखिल करने के दौरान उनके साथ देखा गया और कुछ घंटों बाद ही वे राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के साथ नजर आईं और अंततः भाजपा उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।
इस अचानक हुए बदलाव पर सबकी नजर है। स्मिता की राजनीतिक पृष्ठभूमि इस मामले को और भी जटिल बना देती है। उनके पिता सुंदरेशन ने 2006 में सीपीआई (एम) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें कहार से हार का सामना करना पड़ा था जबकि कहार ने दूसरी बार चुनाव जीता था।
उनका पार्टी बदलना प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों ही दृष्टियों से देखा जा रहा है, जिससे उनके पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
जॉय के लिए इस घटनाक्रम का समय विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। पार्टी की जिला इकाई में उनके नेतृत्व को कथित तौर पर आंतरिक असहमति का सामना करना पड़ा है और संगठन के कुछ वर्गों ने असंतोष व्यक्त किया है। कथित रूप से करीबी उम्मीदवार का उभरना उनके चुनावी समीकरण को और भी पेचीदा बना सकता है।
तीन अलग-अलग राजनीतिक ताकतों के सक्रिय होने से वर्कला एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र बनता जा रहा है जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम हो सकता है और परिणाम अनिश्चित हो सकते हैं, जिससे यह जिले की एक महत्वपूर्ण सीट बन गई है।
--आईएएनएस
