लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहलें लगातार सामने आ रही हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित 14566 अत्याचार एवं उत्पीड़न हेल्पलाइन अब प्रदेश के पीड़ितों के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर उभरी है, जिसने समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शिता के जरिए न्याय की पहुंच को और सुलभ बनाया है।
प्रदेश सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि किसी भी पीड़ित को न्याय से वंचित न रहने देना। इसी प्रतिबद्धता के तहत संचालित 14566 हेल्पलाइन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए कुल 553 शिकायतों का समाधान सुनिश्चित किया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 628 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 75 शिकायतें डुप्लीकेट पाई गईं। इन्हें अलग करने के बाद शेष सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया गया।
महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में 45, मई में 37, जून और जुलाई में 65-65, अगस्त में 57, सितंबर में 80, अक्टूबर में 79, नवंबर में 40, दिसंबर में 35, जनवरी में 37, फरवरी में 48 और मार्च में 40 शिकायतें दर्ज हुईं। प्रत्येक शिकायत को संबंधित जिले को तत्काल प्रेषित कर कार्रवाई सुनिश्चित कराई गई।
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हेल्पलाइन की पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुदृढ़ और पारदर्शी बनाया गया है। कॉल प्राप्त होते ही शिकायत को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित जिले को भेजा जाता है, साथ ही विभागीय अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी जाती है ताकि हर स्तर पर निगरानी बनी रहे। कार्रवाई पूरी होने के बाद पीड़ित से फीडबैक लेकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे वास्तविक न्याय मिला है या नहीं।
विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि किसी के साथ अत्याचार या उत्पीड़न की घटना होती है, तो वह बिना झिझक 14566 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकता है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाकर शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है।
--आईएएनएस
