नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) स्थित साइबर लैब ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस लैब को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा 'आईएसओ 9001:2015 क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम' सर्टिफिकेशन मिला है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले बीआईएस द्वारा मिला यह सर्टिफिकेट लैब की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर मुहर लगाता है।
यह सर्टिफिकेशन इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह साइबर लैब के उस व्यवस्थित और प्रोसेस-ड्रिवन कामकाज को मान्यता देता है, जिसमें डिजिटल सबूतों और साइबर अपराधों की जांच को बेहद सटीक और मानकीकृत तरीके से किया जाता है।
साइबर लैब में डिजिटल फॉरेंसिक से जुड़े कई आधुनिक काम होते हैं, जैसे मोबाइल फोन की जांच, कंप्यूटर और हार्ड डिस्क से डेटा निकालना, क्लाउड से जुड़े सबूतों की जांच, क्रिप्टोकरेंसी ट्रैकिंग, और यहां तक कि मैलवेयर एनालिसिस भी। यहां पर इस्तेमाल होने वाले टूल्स और तकनीकें काफी एडवांस हैं और इंटरनेशनल लेवल की फॉरेंसिक तौर-तरीकों का पालन किया जाता है।
इस लैब का सबसे बड़ा काम यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी डिजिटल सबूत कोर्ट में मान्य हो। इसके लिए सबूतों को सही तरीके से इकट्ठा करना, सुरक्षित रखना और बिना किसी छेड़छाड़ के जांच करना बेहद जरूरी होता है। इसी प्रक्रिया को चेन ऑफ कस्टडी कहा जाता है, जिसे यहां बहुत सख्ती से फॉलो किया जाता है।
यह साइबर लैब साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, रैनसमवेयर अटैक, डेटा चोरी और फाइनेंशियल साइबर क्राइम जैसे मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाती है। आज के डिजिटल दौर में जब अपराध भी टेक्नोलॉजी के जरिए हो रहे हैं, ऐसे में इस तरह की लैब पुलिसिंग सिस्टम के लिए बहुत जरूरी हो गई है।
इस उपलब्धि पर सतीश गोलछा ने साइबर लैब की टीम को बधाई दी। उन्होंने डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम, एसीपी मुकेश राठी और इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव समेत पूरी टीम की मेहनत और प्रोफेशनलिज्म की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां पुलिसिंग को और ज्यादा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और भरोसेमंद बनाती हैं।
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