नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव और नौकरी से निकाले जाने के आरोपों के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट जगत में धर्मांतरण और अन्य संगठित गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिशें हो रही हैं, जिनकी निष्पक्ष और गहन जांच की जानी चाहिए।
विनोद बंसल ने कहा कि हाल में सामने आए आरोप न केवल आईटी सेक्टर बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं। उनके अनुसार, यदि किसी कर्मचारी पर उसकी धार्मिक मान्यताओं को बदलने के लिए दबाव बनाया गया है और इनकार करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई हुई है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि इससे पहले टीसीएस में भी "कॉरपोरेट जिहाद" सामने आया था। मामले की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे और अब विप्रो से जुड़ी खबरों ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है। वीएचपी प्रवक्ता ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी द्वारा कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार का षड्यंत्र, दबाव, भेदभाव या अवैध गतिविधि सामने आती है, तो उससे जुड़े सभी लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, कानून के दायरे में रहकर दोषियों को सजा मिलना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बंसल ने बताया कि हाल ही में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री की ओर से उद्योग और व्यापार से जुड़े विभिन्न संगठनों को पत्र भेजा गया है। इस पत्र में कंपनियों और संस्थानों से आग्रह किया गया है कि वे अपने कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के धार्मिक दबाव, भेदभाव, उत्पीड़न या अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए स्पष्ट नीतियां बनाएं और उनका पालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि कार्यस्थल ऐसे होने चाहिए जहां सभी कर्मचारी बिना किसी डर, दबाव या भेदभाव के काम कर सकें। किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी धार्मिक पहचान, विचारधारा या निजी मान्यताओं के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी को इस प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है तो उसके लिए शिकायत और समाधान की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
विनोद बंसल ने समाज से भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या संदिग्ध गतिविधियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और ऐसी किसी घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक जागरूकता और कानूनी कार्रवाई, दोनों मिलकर ही ऐसे मामलों को रोकने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, "जिहादी, जिहादी होता है, यह हिन्दू समाज को समझना पड़ेगा और उनका सार्वजनिक रूप से बहिष्कार भी करना पड़ेगा। उनके साथ किसी भी तरह का व्यवहार आपके लिए खतरनाक हो सकता है, यह अनेक घटनाओं में स्पष्ट हो चुका है। यह लार्जर कॉन्सपिरेसी का हिस्सा है, चाहे वह पढ़े-लिखे हों, गरीब हों, पैसे वाले हों या उच्च योग्यता प्राप्त व्यक्ति हों। इन लोगों के मन-मस्तिष्क में कट्टरपंथी सोच हावी रहती है। ऐसी कट्टरपंथी सोच का सैनिटाइजेशन करना बहुत जरूरी है।"