चेन्नई: भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने उन सभी आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा जा रहा है कि परिसीमन की वजह से दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व संसद में कम हो जाएगा।
भाजपा नेता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में गुरुवार को साफ किया कि ऐसा कुछ भी नहीं है। परिसीमन की वजह से दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी खुद सामने आकर इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि दक्षिण भारत के राज्यों को इससे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा, उन्होंने परिसीमन के तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और अन्य सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एमके स्टालिन संसद परिसर में परिसीमन के विरोध में काले कपड़े पहनकर दाखिल हो रहे हैं। मैं एक बात साफ कर देना चाहती हूं कि इससे उन्हें कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है। इससे उनके हाथ खाली ही रहेंगे।
उन्होंने कहा कि इससे पहले इसी मुख्यमंत्री ने ताजमहल के प्रकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहती हूं कि आखिर मुख्यमंत्री को इस विरोध प्रदर्शन से क्या अर्जित हो गया। जवाब साफ है कि कुछ भी अर्जित नहीं हुआ।
तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा कि आज की तारीख में तमिलनाडु की स्थिति कैसी है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति किसी से छुपी नहीं है। राज्य में महिलाओं की सुरक्षा बिल्कुल ना के बराबर है। अफसोस की बात है कि मुख्यमंत्री इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाते हैं। इसके विपरीत, वो अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए परिसीमन के मुद्दे का जिक्र कर रहे हैं, जिससे मुझे लगता है कि किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि आज की तारीख में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की स्थिति ऐसी बन चुकी है कि वो ऐसे मुद्दों का जिक्र प्रदेश की राजनीति में कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल भी प्रासंगिक नहीं है। उधर, केंद्र सरकार की तरफ से स्पष्ट किया जा चुका है कि परिसीमन से दक्षिण के राज्य बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होंगे।
इसके अलावा, उन्होंने डीएमके पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि डीएमके ने ही हमेशा से यह कोशिश की है कि कोई भी तमिल नेता प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमन नहीं हो पाए। मैं एक बात साफ कर देना चाहती हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु से जुड़े विषयों को लेकर हमेशा से चिंतित रहते हैं। आप उनकी चिंता का अंदाजा महज इसी से लगा सकते हैं कि वो करीब 24 बार तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं। इससे यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे तमिलनाडु को लेकर कितने फ्रिक्रमंद रहते हैं।
--आईएएनएस
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