हैदराबाद, 3 जून (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने बुधवार को कहा कि तेलंगाना को आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से देशभक्ति का कोई पाठ सीखने की जरूरत नहीं है।
हैदराबाद में मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सेना पार्टी के नेता द्वारा की गई टिप्पणियों पर रामा राव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, "हमें पवन कल्याण से देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है। संघर्ष और बलिदान हमारे लिए कोई नई बात नहीं है।"
केटीआर ने पवन कल्याण को याद दिलाया कि तेलंगाना भारत का तीन प्रतिशत से भी कम हिस्सा है, लेकिन भारत की जीडीपी में इसका योगदान पांच प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, "हमें किसी तरह के नैतिक उपदेश या नैतिक निगरानी की जरूरत नहीं है। हम आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में उनका सम्मान करते हैं। एक कलाकार और अभिनेता के रूप में हम उनकी प्रशंसा करते हैं। अगर वे भाई की तरह हमसे मिलने आते हैं, तो हम उन्हें हैदराबादी बिरयानी खिलाएंगे, लेकिन अगर वे हमारी राजनीति में अपना दबदबा कायम करने की कोशिश करते हैं तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। आखिरकार 2014 में अभी हाल ही में अलग होने के लिए हमने 60 वर्षों का इतना बड़ा संघर्ष किया है।"
हैदराबाद प्रेस क्लब में आयोजित बैठक के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए केटीआर ने कहा कि तेलंगाना में पवन कल्याण को कोई नहीं रोक रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पवन कल्याण और उनका परिवार यहीं रहता है और उनके व्यवसाय भी यहां हैं। पिछले 12 वर्षों में किसी ने उन्हें नहीं रोका।
पवन कल्याण की टिप्पणी कि तेलंगाना किसी के बाप की जागीर नहीं है, पर प्रतिक्रिया देते हुए केटीआर ने कहा कि तेलंगाना निश्चित रूप से यहां की मिट्टी के बेटों की जागीर है और इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
पवन कल्याण के इस बयान पर कि क्षेत्रवाद आतंकवाद से अधिक खतरनाक है, केटीआर ने सवाल किया कि तेलुगु राज्य की मांग को लेकर 58 दिनों तक अनशन कर अपने प्राणों की आहुति देने वाले पोट्टी श्रीरामुलु के बारे में वह क्या कहेंगे।
बीआरएस नेता ने पवन कल्याण से यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के प्रधानमंत्री की तरह व्यवहार करते हुए तेलंगाना आने वाले उद्योगों को गुजरात ले जाने के बारे में उनकी क्या राय है?
तेलंगाना में चुनाव लड़ने की पवन कल्याण की घोषणा पर केटीआर ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत किसी भी नागरिक को राजनीतिक दल बनाने और किसी भी राज्य से चुनाव लड़ने का अधिकार है।
हालांकि उन्होंने कहा कि किसी राज्य से चुनाव लड़ने वाले नेता को वहां के लोगों की आकांक्षाओं, उनके संघर्षों और बलिदानों का सम्मान करना चाहिए।
केटीआर ने कहा कि जन सेना का तेलंगाना में चुनाव लड़ना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, “क्या आपने 2023 के विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे? आपने हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में भी हिस्सा लिया था।”
बीआरएस नेता ने कहा कि कोई भी पवन कल्याण को चुनाव लड़ने से नहीं रोक रहा है।
उन्होंने कहा, “यह कोई ऐसा राज्य नहीं है जो यूं ही बन गया हो। हजारों लोगों के बलिदान के बाद तेलंगाना का गठन हुआ है। इसलिए यहां आने पर बोलने से पहले सोच-विचार करना चाहिए।”
केटीआर ने तेलंगाना के गठन के तरीके को लेकर पवन कल्याण की टिप्पणी पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “आप कहते हैं कि आपको तेलंगाना के गठन का तरीका पसंद नहीं आया। कोई दूसरा कहता है कि बच्चे को बचाने के लिए मां की हत्या कर दी गई। घुमा-फिराकर कहने की बजाय साफ-साफ कहिए कि आपको तेलंगाना राज्य का गठन पसंद नहीं था।”
--आईएएनएस
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