Swami Sahajanand Saraswati : स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने किया नमन

किसान आंदोलन के अग्रदूत सहजानंद सरस्वती को नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली: समाज सुधारक और किसान आंदोलन के अग्रदूत स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। शाह ने कहा कि स्वामी सहजानंद ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध समाज को जागरूक किया।

गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "जाति, धर्म और पंथ में बंटे देश को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए आजीवन कटिबद्ध स्वामी सहजानंद सरस्वती जी ने किसानों को एकजुट कर आजादी के आंदोलन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध समाज को जागरूक किया। स्वामी सहजानंद सरस्वती जी को उनकी जयंती पर नमन।"

 

केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "महान समाज सुधारक, दार्शनिक, किसान हितों के रक्षक और आदि शंकराचार्य सम्प्रदाय के दशनामी संन्यासी अखाड़े के दण्डी संन्यासी स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं। आपका आदर्श जीवन और पुण्य विचार सदैव हमें राष्ट्र, समाज एवं किसान की उन्नति के कार्यों के लिए प्रेरित करते रहेंगे।"

 

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने पोस्ट में लिखा, "प्रसिद्ध समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और किसान आंदोलन के प्रणेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।"

 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी सहजानंद सरस्वती को याद किया। उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "कर्मयोगी, समाजसुधारक और प्रखर चिंतक स्वामी सहजानंद सरस्वती जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। किसान कल्याण, सामाजिक जागृति और वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए उनका तपस्वी जीवन सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।"

 

22 फरवरी 1889 को जन्मे स्वामी सहजानंद सरस्वती भारत में संगठित किसान आंदोलन के जनक माने जाते हैं। उन्होंने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की। इसके बाद 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

सहजानंद सरस्वती ने किसानों के अधिकारों, जमींदारी प्रथा के उन्मूलन और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया। इसके अलावा, किसानों के हितों की अनदेखी के कारण उन्होंने स्वतंत्र किसान आंदोलन को मजबूत किया। उनके नेतृत्व ने बिहार के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में किसान चेतना को नई दिशा दी थी।

 

--आईएएनएस

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...