नई दिल्ली: कैश फॉर क्वेरी मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली राहत के खिलाफ दाखिल लोकायुक्त की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ फिलहाल किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि अभी लोकपाल सीबीआई को उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए नहीं कह सकता।
सीजीआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने लोकपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए महुआ मोइत्रा, सीबीआई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को नोटिस जारी किया है और तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि नोटिस केवल इस बात को तय करने के लिए जारी किया गया है कि लोकपाल की शक्तियों की सीमा क्या है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्देश पर भी रोक लगा दी, जिसमें लोकपाल से कहा गया था कि वह 60 दिन के भीतर तय करे कि महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी जाए या नहीं।
कोर्ट में सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और लोकपाल की तरफ से सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार पेश हुए।
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने लोकपाल की शक्तियों को लेकर जो कहा, उससे सीबीआई सहमत है, लेकिन महुआ मोइत्रा की इस मामले में जांच होनी ही चाहिए।
लोकपाल की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि हम यहां हाईकोर्ट द्वारा लोकपाल को लेकर दिए गए आदेश पर सुनवाई चाहते हैं।
वहीं, महुआ मोइत्रा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखने की मांग की। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या लोकपाल किसी आरोपी सरकारी कर्मचारी को नोटिस जारी कर सकता है और क्या वह दलीलें सुन सकता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये ऐसे कानूनी मुद्दे हैं जो पहली बार सामने आए हैं। इसलिए लोकपाल की शक्तियों, उनकी वैधानिक सीमाओं और जांच के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर विस्तार से विचार करना जरूरी है।
लोकपाल ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और वर्तमान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से जुड़े आरोपों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
--आईएएनएस
