Maharashtra Political News : 'संविधान ही एकमात्र 'ब्रह्मवाक्य' है', 'सामना' में शिवसेना (यूबीटी) ने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर कसा तंज

स्पीकर के अधिकारों पर बयान से छिड़ी बहस, शिवसेना (यूबीटी) ने फडणवीस पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
'संविधान ही एकमात्र 'ब्रह्मवाक्य' है', 'सामना' में शिवसेना (यूबीटी) ने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर कसा तंज

मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में अपने हालिया बयान से एक तीखी बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्पीकर या चेयरपर्सन के निर्देश 'अंतिम' या 'दिव्य वचन (ब्रह्मवाक्य)' नहीं होते हैं।

इसने इस रुख को 'राजनीतिक सुविधा' का मामला करार दिया और सरकार के पिछले रुख में मौजूद विरोधाभासों की ओर इशारा किया।

उद्धव ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा कि यह विवाद सतारा में भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच जिला परिषद अध्यक्ष पद को लेकर हुई झड़प से उपजा है। घटना के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर भाजपा का पक्ष लिया, जिससे मंत्री शंभूराज देसाई के साथ कहासुनी हुई।

इसके जवाब में हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुई विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी को निलंबित करने का निर्देश दिया। हालांकि, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने निलंबन लागू करने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि अंतिम निर्णय लेने की शक्ति कार्यपालिका के पास है और अध्यक्ष के निर्देश सर्वोपरि नहीं हैं।

इस पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि यदि अध्यक्ष की कुर्सी से दिए गए निर्देश 'ब्रह्मवाक्य' नहीं हैं तो मुख्यमंत्री को तुरंत यह घोषणा करनी चाहिए कि विधानसभा स्पीकर द्वारा 10 जनवरी 2024 को विधायक की अयोग्यता के संबंध में लिया गया निर्णय भी 'ब्रह्मवाक्य' नहीं था। लोकतंत्र में किसी भी पद से लिया गया कोई भी निर्णय आलोचना से परे नहीं होता। यह न्यायिक समीक्षा के अधीन होता है। केवल एक ही 'ब्रह्मवाक्य' है और वह है संविधान।

संपादकीय में कहा गया, "यह दोहरा मापदंड कई लोगों को 10 जनवरी 2024 की याद दिलाता है। उस दिन विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे और 15 अन्य लोगों को अयोग्य घोषित करने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने खुलेआम दलबदल करके संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने शिंदे गुट को 'असली शिवसेना' के रूप में मान्यता देने का 'कारनामा' भी किया।"

इसमें आगे कहा गया, "उस समय फडणवीस और शिंदे गुट ने उस फैसले को 'ब्रह्मवाक्य' के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने इसे सत्य की 'कानूनी रूप से सही' और 'ऐतिहासिक' जीत बताया था। किसी ने भी कार्यपालिका के अधिकार का जिक्र नहीं किया और न ही यह दावा किया कि फैसला अंतिम नहीं था।"

उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि यदि अध्यक्ष के निर्देश आज अंतिम नहीं हैं तो सीएम देवेंद्र फडणवीस को तुरंत यह घोषणा करनी चाहिए कि विधायक की अयोग्यता पर 10 जनवरी का निर्णय भी अंतिम 'ब्रह्मवाक्य' नहीं था।

संपादकीय में उल्लेख किया गया, "अगर सीएम देवेंद्र फडणवीस ईमानदार हैं, तो उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए कि 10 जनवरी के फैसले की भी समीक्षा की जा सकती है। इस बात को भी दोहराया गया कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति का निर्णय सर्वोपरि नहीं होता। एकमात्र सच्चा 'ब्रह्मवाक्य' संविधान है।"

--आईएएनएस

 

 

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