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नई दिल्ली/बेंगलुरु, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक सरकार की हालिया इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में पीछे जा रहा है।
जोशी के कार्यालय द्वारा जारी रिकॉर्डेड वीडियो बयान में उन्होंने विशेष रूप से ईवी पर टैक्स छूट वापस लेने और उन पर 'लाइफटाइम रोड टैक्स' लगाने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे "सुधारों से पीछे हटना" बताया और चेतावनी दी कि इससे मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
मंत्री ने सवाल उठाया कि जब बाकी देश और दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रही है, तो कर्नाटक उल्टी दिशा में क्यों जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य की ईवी नीति में एक बड़ा यू-टर्न है। जहां अन्य राज्य टैक्स में छूट और सहायक नीतियों के ज़रिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं कर्नाटक हरित ऊर्जा विकल्पों के इस्तेमाल को हतोत्साहित कर रहा है।
जोशी ने बताया कि इस फैसले के कारण इलेक्ट्रिक वाहन महंगे हो जाएंगे, जिससे आम लोगों और खासकर मध्यम वर्ग के लिए उन्हें खरीदना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे राज्य में ईवी अपनाने की गति धीमी पड़ सकती है।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए मंत्री ने कहा कि जिसे कभी स्वच्छ परिवहन के लिए मॉडल माना जाता था, वह अब उन नीतियों के कारण पीछे जा रहा है जिन्हें उन्होंने "जन-विरोधी, नवाचार-विरोधी और प्रौद्योगिकी-विरोधी" बताया।
जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार सतत विकास की बजाय केवल राजस्व जुटाने को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के फैसलों से न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग प्रभावित होगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य भी पीछे रह जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लाइफटाइम टैक्स लगाने का निर्णय केवल रेवेन्यू बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को महंगा बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से डीजल और पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार फ्यूल-आधारित टैक्स रेवेन्यू पर निर्भर हो रही है। उनका मानना है कि यह नीति लंबी अवधि के सस्टेनेबल और साफ-सुथरे ऊर्जा समाधान की दिशा में बाधा बन सकती है।
जोशी ने कहा कि पूरा देश अब सस्टेनेबल ऊर्जा और पर्यावरण के अनुकूल समाधानों की ओर बढ़ रहा है। लेकिन, कर्नाटक में लागू किए जा रहे ये कदम राज्य के लंबे समय के पर्यावरणीय लक्ष्यों को कमजोर कर सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य की कांग्रेस सरकार से आग्रह किया कि वह इस फैसले पर फिर से विचार करे और ऐसी नीतियों को अपनाने से बचें, जो सस्टेनेबल भविष्य की दिशा में रुकावट पैदा कर सकती हैं।
--आईएएनएस
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