नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने साकेत में इमारत गिरने की घटना को हादसा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा बताया है। उन्होंने इस मामले में एमसीडी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अंकुश नारंग ने लिखा, "साकेत भवन की घटना कोई हादसा नहीं है, बल्कि भाजपा की सरकार वाली एमसीडी में अधिकारियों के भ्रष्टाचार, लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा है।"
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायतों और अवैध निर्माण की सूचना के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसकी कीमत बेगुनाह लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी।
उन्होंने कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की है कि घटना की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों और इंजीनियरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और मदद सुनिश्चित की जाए। नारंग ने पत्र की प्रति भी सार्वजनिक रूप से साझा की।
पत्र में आगे कहा गया है, "एमसीडी को दिल्लीवासियों की जान लेने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन एमसीडी के अधिकारी अपने छोटे-मोटे निजी स्वार्थों के लिए दिल्ली के निवासियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।"
अंकुश नारंग ने अपने पत्र में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें साकेत में इमारत गिरने के सटीक कारणों की गहन जांच कराने, स्वीकृत भवन योजनाओं, निर्माण अनुमतियों और संबंधित निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच करने, दोषी अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई करने, पूरे दिल्ली में टूटी-फूटी, अवैध और कमजोर इमारतों का व्यापक सर्वे कराने, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और जांच की पूरी रिपोर्ट को सदन में पेश करने की मांग शामिल है।
अंकुश नारंग ने जोर देकर कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसी घटनाओं में जवाबदेही तय करना अनिवार्य है। उन्होंने एमसीडी प्रशासन से अपील की कि इस मामले को जितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, उतनी तेजी से कार्रवाई की जाए।