OBC Reservation Controversy : धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध, राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

राज्यसभा में ओबीसी आरक्षण पर मुस्लिम समुदाय को बाहर करने को लेकर हंगामा, विपक्ष ने किया वॉकआउट।
धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध, राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

नई दिल्ली:  राज्यसभा में सोमवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी से मुस्लिम समुदाय को बाहर किए जाने का मुद्दा उठाया।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलना चाहिए और इसे धर्म के आधार पर नहीं दिया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद विपक्ष ने सरकार के रुख के खिलाफ विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।

'इंडिया' एलायंस सांसदों ने इसे विभाजनकारी मुद्दा बताया। इसे संविधान और सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया गया।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य के. लक्ष्मण ने सदन में कहा कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए बनाए गए आरक्षण का कुछ राज्यों में धर्म के आधार पर दुरुपयोग किया जा रहा है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करना है, लेकिन कुछ राज्य सरकारें इसे धार्मिक पहचान से जोड़कर लागू कर रही हैं। उन्होंने विभिन्न राज्यों का उल्लेख किया और कई राज्यों के उदाहरण भी दिए।

उन्होंने कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय को ओबीसी सूची में एक श्रेणी के रूप में शामिल कर लगभग 4 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का उल्लेख किया। भाजपा सांसद ने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे वास्तविक पिछड़े वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे ही तमिलनाडु में भी मुस्लिम समुदाय के लिए अलग से आरक्षण व्यवस्था का जिक्र किया गया। केरल में भी मुस्लिम समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल कर आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने की बात कही गई।

उन्होंने तेलंगाना में भी मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष आरक्षण का मुद्दा उठाया। भाजपा सांसद ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ मामलों में न्यायालयों (हाईकोर्ट) ने इस प्रकार की व्यवस्थाओं पर आपत्ति जताई है।

उन्होंने बीआर अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण का आधार धर्म नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि धर्म आधारित आरक्षण की व्यापक समीक्षा कराई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुंचे। सामाजिक न्याय की मूल भावना को बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को बचाना जरूरी है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि अगर आरक्षण को केवल धार्मिक पहचान से जोड़ा गया, तो इससे सामाजिक न्याय की मूल भावना कमजोर होगी और वास्तविक रूप से वंचित वर्गों को नुकसान होगा।

--आईएएनएस

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...