मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने ममता बनर्जी का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा, "मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि मन से हारना और चुनाव हारना, दोनों अलग-अलग बिंदु हैं। बेशक ममता बनर्जी को चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उनका हौसला अभी टूटा नहीं है।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा के लिए किसी भी सूरत में पश्चिम बंगाल चुनाव जीतना आसान नहीं था, लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं है कि सिर्फ पश्चिम बंगाल में जीत का परचम लहराने के लिए भाजपा और चुनाव आयोग के बीच गठबंधन हुआ था और मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि यह इसी गठबंधन का नतीजा है कि आज की तारीख में भाजपा पश्चिम बंगाल में अपना जीत का झंडा बुलंद करने में सफल हो पाई है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि यह कोई आसान बात नहीं है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के इशारे पर साजिशन 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इनके नाम सूची से हटाने का मुख्य मकसद यही था कि प्रदेश में भाजपा के लिए स्थिति अनुकूल हो सके, ताकि उसके लिए आगे जीत का मार्ग प्रशस्त हो।
उन्होंने कहा कि अब मौजूदा समय में स्थिति ऐसी बन चुकी है कि चुनाव आयोग हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं रहा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हो रहा है। अब ऐसी स्थिति में हमारी बात कौन सुनेगा? वहीं, प्रधानमंत्री भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
संजय राउत ने कहा कि सिर्फ प्रदेश को जीतने के लिस आप लोगों ने पूरा जोर तोड़ लगा लिया, ताकि प्रदेश में आपके लिए स्थिति अनुकूल हो सके।
--आईएएनएस
