पुणे, 4 जून (आईएएनएस)। पुणे के हिंजवडी क्षेत्र में कार्यरत एक निजी बीमा कंपनी की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर यौन उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणियां करने, निजी मुलाकातों के लिए दबाव बनाने और नौकरी से निकालने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला की शिकायत के आधार पर हिंजवडी पुलिस मामले की जांच कर रही है।
शिकायत के अनुसार, पीड़िता एक निजी बीमा कंपनी में सीनियर एसोसिएट के पद पर कार्यरत थी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की हिंजवडी तथा वाकड़ शाखाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालती थी। महिला का आरोप है कि कंपनी के एरिया मैनेजर मोहम्मद सादिक जनवरी से लगातार उससे व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे, जबकि कार्य संबंधी रिपोर्टिंग उसे अपने टीम लीडर को करनी होती थी।
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि 19 मई को काम खत्म होने के बाद उसे औंध स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालय बुलाया गया। वहां बैठक समाप्त होने के बाद जब वह घर जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी, तब आरोपी अधिकारी अपनी कार लेकर पहुंचा और घर छोड़ने के बहाने उसे वाहन में बैठा लिया। शिकायत के मुताबिक, रास्ते में अधिकारी ने आपत्तिजनक और संकेतात्मक बातें कीं तथा काफी देर तक कार सड़क किनारे खड़ी रखी। महिला का दावा है कि वाहन लॉक होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सकी। उसने आरोप लगाया कि घर छोड़ते समय उसे इस मुलाकात के बारे में किसी को जानकारी न देने और ऐसा करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
29 मई को एरिया मैनेजर ने एक ग्राहक से मिलने के बहाने उसे अपने साथ चलने को कहा। महिला का आरोप है कि दोनों हिंजवडी से लोणावला हाईवे स्थित एक ढाबे की ओर गए, जहां यात्रा के दौरान अधिकारी ने अशोभनीय टिप्पणियां कीं। वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करने संबंधी बातें कहीं और आर्थिक लाभ का प्रलोभन देने की कोशिश की। आरोपी ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश भी की। बाद में लोणावला में एकांत स्थान पर समय बिताने का सुझाव दिया।
महिला का कहना है कि अधिकारी के व्यवहार से असहज होकर उसने अपने एक रिश्तेदार को फोन कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद मामला कंपनी के अन्य अधिकारियों तक भी पहुंचा। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसकी जानकारी मिलने पर आरोपी उसे तुरंत वापस पुणे लेकर आया और रास्ते में किसी को कुछ बताने पर नौकरी और करियर बर्बाद करने की धमकी दी।
पीड़िता के अनुसार, उसने अगले दिन अपने परिजनों के साथ कंपनी प्रबंधन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने हिंजवडी पुलिस स्टेशन पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित महिला ने बताया कि शुरुआत में कंपनी के लोगों ने मुझे कहा कि यदि मैं अपने सुपरवाइजर के साथ शारीरिक संबंध बनाऊं तो वे मुझे दुबई भेजने में मदद करेंगे। पहले दिन से ही शाहिना रफीक नाम की एक मुस्लिम महिला मुझे लगातार परेशान कर रही थी। उसने मुझसे कहा कि 'तुम्हारी योग्यता देखते हुए विप्रो तुम्हें जो वेतन दे रही है, वह बहुत कम और लगभग न के बराबर है। इससे अच्छा है कि तुम राम कुमार के साथ शारीरिक संबंध बना लो। फिर दुबई जाओ। वहां मेरे कई शेख परिचित हैं, मैं तुम्हारी शादी किसी एक शेख से करा दूंगी, जिससे तुम्हें अच्छा आर्थिक सहयोग मिलेगा।
पीड़िता ने कहा कि मैंने 10 महीने तक लगातार यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और दबाव सहा। उन्होंने हिंदू महिलाओं को फंसाने, उन्हें अपनी शर्तें मानने या नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। यह एक प्रकार से छुपा हुआ धर्मांतरण का तरीका लगता था। जब मैंने इसकी शिकायत की तो कंपनी इसे दबाने की कोशिश कर रही है। नौकरी जाने के बाद भी इस मुद्दे को फिर से उठाया। मैंने कंपनी से पूछा कि मुझे नौकरी से क्यों निकाला गया? क्या मेरे काम में कोई गलती थी या मेरे व्यवहार में कोई समस्या थी? यदि मुझे सिर्फ इसलिए निकाला गया है क्योंकि मैं मुस्लिम समाज के खिलाफ बोल रही थी और उत्पीड़न का विरोध कर रही थी, तो यह पूरी तरह एकतरफा और अन्यायपूर्ण है। मेरी मांग है कि मुझे मेरी नौकरी वापस दी जाए क्योंकि मैं इसके योग्य हूं और मैंने कोई गलती नहीं की है।
इस पूरे मामले में महिला ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 75, 78 और 351(2) के तहत आरोपी अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और तथ्यों के सत्यापन के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता के संबंध में कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा। फिलहाल आरोपी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
--आईएएनएस
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