नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गाजियाबाद के साई उपवन सिटी फॉरेस्ट में पर्यावरण को हुए बड़े नुकसान के मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि यहां कई सालों से कचरा फेंकने और सीवेज जमा होने की वजह से करीब 70,000 पेड़ नष्ट हो गए हैं।
यह मामला राजेंद्र त्यागी (पूर्व नगर निगम पार्षद और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के बोर्ड सदस्य) द्वारा दायर याचिका पर सुना गया। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई (2 जुलाई) से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करें।
एनजीटी ने जिन संस्थाओं को नोटिस भेजा है, उनमें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला मजिस्ट्रेट, यूपी वन विभाग, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और गाजियाबाद नगर निगम शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि याचिका में कई मुद्दे उठाए गए थे, जैसे अवैध निर्माण, अतिक्रमण, पशुओं की चराई और गैर-वन गतिविधियां। लेकिन, फिलहाल याचिकाकर्ता ने अपने वकील आकाश वशिष्ठ के माध्यम से मामले को केवल ठोस और तरल कचरा प्रबंधन के मुद्दे तक सीमित रखा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि करीब 200 एकड़ के साई उपवन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से कचरा डंप किया जा रहा है और उसे जलाया भी जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।
इस अर्जी में यह भी चिंता जताई गई है कि जंगल के इलाके से गुजरने वाले एक बरसाती नाले में बिना साफ (ट्रीट किए) किए सीवेज और गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। आरोप है कि बारिश के समय यह नाला भरकर बहने लगता है, जिससे आसपास का हरा-भरा इलाका पानी में डूब जाता है।
अर्जी के अनुसार, कचरा डंप करने, पुराने कचरे के जमा होने और सीवेज के प्रदूषण के लंबे समय तक असर के कारण लगभग 70,000 पेड़ सूख गए हैं। इससे मास्टर प्लान 2021 और 2031 के तहत आने वाले 'सिटी फॉरेस्ट' की स्थिति बहुत खराब हो गई है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 19 मार्च के अपने आदेश में अर्जी देने वाले को निर्देश दिया कि वह अर्जी की कॉपी सभी संबंधित पक्षों को दे और अगली सुनवाई से पहले इसका हलफनामा दाखिल करे कि उसने ऐसा कर दिया है। साथ ही, एनजीटी ने यह भी अनुमति दी कि अर्जी देने वाला इस इलाके से जुड़े अन्य मुद्दों को अलग अर्जी के माध्यम से उठा सकता है।
करीब 200 एकड़ में फैला 'साई उपवन' गाजियाबाद के सबसे बड़े सिटी फॉरेस्ट में से एक माना जाता है। अर्जी में इसे शहर के 'हरे फेफड़े' (ग्रीन लंग्स) के रूप में बताया गया है, जो प्रदूषण से जूझ रहे इलाके में हवा को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
--आईएएनएस
