Mithun Chakraborty Statement : ममता बनर्जी के आने के बाद बंगाल में हुआ हिंदू-मुस्लिम विभाजन : मिथुन चक्रवर्ती

भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की राजनीति पर सवाल उठाए।
ममता बनर्जी के आने के बाद बंगाल में हुआ हिंदू-मुस्लिम विभाजन : मिथुन चक्रवर्ती

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है और चुनाव के ऐलान के साथ ही राजनीति का पारा भी गरम है।

अब मशहूर अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा है और उन पर समुदायों में फूट डालकर वोट की राजनीति करने का भी आरोप लगाया है।

आईएएनएस से खास बातचीत में खानपान के मुद्दे पर भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने कहा, "भाजपा 21 राज्यों में सरकार चला रही है, क्या वे वहां के लोगों के खानपान का फैसला कर रहे हैं? लोग अपनी मर्जी से खा रहे हैं, है ना? वे मछली, चिकन और सब कुछ खा रहे हैं। हां, कुछ जगहों पर धार्मिक कारणों से कुछ खास तरह के मांस पर प्रतिबंध लगाया गया है, खासकर उन क्षेत्रों में जो हमारे लिए बहुत संवेदनशील हैं। हम भी उनके कुछ फैसलों की इज्जत करते हैं लेकिन कुछ लोगों को इसी को लेकर राजनीति करनी है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने कहा, "यह विभाजन आज से शुरू नहीं हुआ है। उनके सत्ता में आने के लगभग एक से डेढ़ साल बाद से यह शुरू हुआ है, यानी दो समुदायों को बांटने के लिए। क्या आपने बंगाल में इससे पहले कभी इस तरह का हिंदू-मुस्लिम विभाजन सुना है? तब से, यह लोगों को बांटने और अपने पक्ष में वोट हासिल करने के बारे में है।

उन्होंने कहा कि हमें पता है कि बंगाल के मुसलमान भाजपा को वोट नहीं करेंगे लेकिन बाकी जगह के लोगों ने वोट किया, तभी तो हम सत्ता में आए हैं। बिहार में भी मुसलमान भाइयों ने भी वोट किया, तभी तो सरकार बनी लेकिन इस बार बंगाल में भी वो लोग वोट करेंगे।

उन्होंने कहा, "क्या आपने कभी किसी पार्टी को 'तृणमूल कांग्रेस को हटाओ' कहते सुना है? नहीं, है ना? वे 'भारतीय जनता पार्टी को हटाओ' कहते हैं, उसे 'फासीवादी पार्टी' कहते हैं लेकिन आप उन्हें 'तृणमूल को हटाओ' कहते नहीं सुनेंगे। इसलिए लोगों को समझ आ रहा है कि ममता क्या करना चाह रही हैं।"

चुनाव लड़ने और मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा पर अभिनेता व भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने कहा, "ये सब मेरी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं। भगवान ने मुझे जो कुछ भी दिया है, मैं उसे पूरी तरह से संभाल नहीं पा रहा हूं। दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, ये सर्वोच्च सम्मान एक गरीब लड़के को मिले हैं, जो फुटपाथ से आया है। मैं अब भी इन सब बातों को समझ नहीं पा रहा हूं। तो मैं और अधिक क्यों चाहूं? अगर मैं चुनाव लड़ता हूं तो एक जगह सीमित हो जाऊंगा और मैं सीमित नहीं होना चाहता हूं।"

--आईएएनएस

 

 

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