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नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के आज 11 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को नारी और युवा शक्ति के लिए बेहतर बताया है।
'मेरी सरकार' की ओर से एक्स पर पीएम मोदी के साथ एक पोस्ट किया गया है, जिसमें लिखा है, "वास्तविक आर्थिक परिवर्तन की शुरुआत हमेशा बोर्डरूम में नहीं होती। कभी-कभी, यह एक छोटे से ऋण, एक स्थानीय विचार और शुरुआत करने के साहस से शुरू होता है। मुद्रा योजना चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दे रही है। बिना गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर, इसने अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम की है, वित्तीय समावेशन का विस्तार किया है और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है।
पोस्ट में बताया गया है कि पहली बार उद्यमी बनने वाले लोग, विशेष रूप से महिलाएं और वंचित समुदाय, आगे बढ़ रहे हैं। सूक्ष्म व्यवसाय बढ़ रहे हैं, स्थानीय रोजगार सृजित हो रहे हैं और अनौपचारिक उद्यम धीरे-धीरे भारत की औपचारिक आर्थिक संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र ने 'मेरी सरकार' के पोस्ट पर लिखा है, "मुद्रा योजना की परिवर्तनकारी क्षमता की एक झलक और इसने हमारी युवा शक्ति और नारी शक्ति पर किस प्रकार सकारात्मक प्रभाव डाला है।"
पीएम मोदी ने एक और एक्स पोस्ट में लिखा है, "पीएम मुद्रा योजना एक ऐसी आर्थिक विचारधारा को दर्शाती है जहां अवसर सुलभ हैं, पहलों को प्रोत्साहित किया जाता है और हर सपने को साकार होने के लिए समर्थन दिया जाता है।"
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 8 अप्रैल 2015 को मुद्रा योजना शुरू की थी। इसका मकसद देश के बेरोजगारों, युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। 8 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 साल पूरे हो रहे हैं। बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को जॉब सीकर्स की जगह पर जॉब क्रिएटर्स बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना बहुत कारगर साबित हुई है।
बीते 11 वर्षों में इस योजना ने देश में करोड़ों की संख्या में युवा उद्यमी तैयार किए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए हैं और करीब 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी का लोन प्रदान किया गया है। महिलाओं और वंचित वर्गों के आर्थिक सशक्तीकरण में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना मील का पत्थर साबित हुई है। इस योजना की करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत संख्या एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों की है।
--आईएएनएस
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