मणिपुर में छह नागा ग्रामीणों के अपहरण मामले की जांच करेगी एनआईए

मुख्यमंत्री ने यूएनसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर शांति बहाली और बंधकों की रिहाई में सहयोग की अपील की
मणिपुर में छह नागा ग्रामीणों के अपहरण मामले की जांच करेगी एनआईए

इंफाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार को घोषणा की कि छह नागा ग्रामीणों के अपहरण मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) का छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री सचिवालय में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों से मिला। बैठक में राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यूएनसी प्रतिनिधिमंडल को बताया कि छह अपहृत नागा ग्रामीणों के मामले की जांच अब एनआईए करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि 13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या के मामले को पहले ही जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 14 मई से कांगपोकपी जिले के कोंसाखुल गांव से अगवा किए गए छह नागा ग्रामीणों की तलाश के लिए लगातार खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने यूएनसी से अपील की कि हालिया घटनाओं के बाद से कथित रूप से बंधक बनाए गए 14 कुकी नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।

मुख्यमंत्री ने कुकी समुदाय के लोगों से भी अपील की कि वे लापता नागा ग्रामीणों की तलाश में सहयोग करें और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद करें।

शांति और सामुदायिक सौहार्द की आवश्यकता पर जोर देते हुए सिंह ने राज्य के सभी समुदायों से सरकार के शांति बहाली प्रयासों में सहयोग देने की अपील की।

यूएनसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अध्यक्ष एन.जी. लोरहो ने किया। राज्य सरकार की ओर से बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो, गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदास सिंह और कई नागा विधायक मौजूद थे।

बैठक के दौरान यूएनसी प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से छह अपहृत नागा ग्रामीणों की तलाश और सुरक्षित रिहाई के प्रयास तेज करने की मांग की।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 13 मई की घटनाओं के बाद कुकी-जो बहुल कांगपोकपी जिले और नागा बहुल सेनापति जिले में अलग-अलग समूहों द्वारा कुकी और नागा समुदायों के कम से कम 50 लोगों को बंधक बनाया गया था।

अधिकारी के मुताबिक, प्रशासन, सामुदायिक नेताओं और विभिन्न नागरिक संगठनों के प्रयासों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के करीब 30 लोगों को रिहा करा लिया गया।

पहाड़ी जिलों में अब भी तनाव बना हुआ है। नागा और कुकी-जो समुदाय हालिया हिंसा के विरोध में अलग-अलग प्रदर्शन कर रहे हैं। खासकर 13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य के घायल होने की घटना के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

कुकी इंपी मणिपुर (केआईएम) द्वारा 13 मई की मध्यरात्रि से पूर्ण बंद लागू किए जाने के कारण कुकी-जो बहुल इलाकों, विशेषकर कांगपोकपी जिले में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। केआईएम कुकी जनजातीय समुदाय के प्रमुख संगठनों में से एक है।

--आईएएनएस

डीएससी

 

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