नई दिल्ली: मानव एकता दिवस हर साल 24 अप्रैल को संत निरंकारी मिशन द्वारा मनाया जाता है। यह दिन केवल एक धार्मिक या आध्यात्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह मानवता को बढ़ावा देने का एक बड़ा संदेश देता है। इस दिन को बाबा गुरबचन सिंह जी महाराज के बलिदान की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने अपने जीवन में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश दिया।
बाबा गुरबचन सिंह जी महाराज संत निरंकारी मिशन के तीसरे सतगुरु थे। उनका जन्म 10 दिसंबर 1930 को पेशावर (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। बाद में उन्हें उनके पिता बाबा अवतार सिंह जी ने मिशन की जिम्मेदारी सौंपी। उस समय समाज में कई तरह की चुनौतियां थीं, लोग जाति, धर्म और विचारों के नाम पर बंटे हुए थे। ऐसे कठिन समय में उन्होंने दुनिया को एकता और प्रेम का रास्ता दिखाया। उन्होंने लोगों को समझाया कि असली धर्म इंसानियत है और हर इंसान एक ही परमात्मा का अंश है।
उन्होंने सीमित साधनों के बावजूद पूरे भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में जाकर सत्संग और मानवता का संदेश फैलाया। उस समय यात्रा करना आसान नहीं था लेकिन उनका उद्देश्य बहुत बड़ा था हर दिल तक शांति और एकता का संदेश पहुँचाना। उन्होंने हमेशा यही समझाया कि इंसान को इंसान से जोड़ो, तो दुनिया अपने आप सुंदर बन जाएगी।
मानव एकता दिवस का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है। इस दिन जगह-जगह सत्संग, भजन और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। लोग एक साथ बैठकर आध्यात्मिक विचार सुनते हैं और जीवन में अच्छाई, सेवा और प्रेम को अपनाने की प्रेरणा लेते हैं। इसके साथ ही रक्तदान शिविर भी लगाए जाते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि किसी जरूरतमंद की जान बचाना सबसे बड़ा पुण्य है। यही कारण है कि यह संदेश बहुत लोकप्रिय है कि 'रक्त नालियों में नहीं बल्कि नसों में बहना चाहिए।'
--आईएएनएस
