कोलकाता: चुनाव आयोग के बाद अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल भी कमीशन की तरह ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है।
सीएम ममता बनर्जी ने बुधवार को उत्तरी बंगाल में एक के बाद एक तीन रैलियों को संबोधित किया। एक रैली में उन्होंने राज्य में पहले से तैनात सीएपीएफ कंपनियों पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ हर वोट चुनाव आयोग के खिलाफ बदला होगा, जिसने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए लोगों को परेशानी दी है।
उन्होंने आगे कहा कि वह सीएपीएफ का बहुत सम्मान करती हैं, लेकिन अब उन्होंने देखा कि पश्चिम बंगाल में वे भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं और भाजपा के झंडे भी ले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की महिलाओं को इस बार मतदान के दिनों में सुबह से ही पोलिंग बूथ की सुरक्षा के लिए खास पहल करनी होगी। अगर आप पश्चिम बंगाल में पांच साल के लिए शांति चाहते हैं तो आपको एक दिन के लिए बूथ की सुरक्षा करनी होगी और बाहरी लोगों को चुनावी गड़बड़ी से रोकना होगा। आपके घर में जो कुछ भी है, उसे लेकर सड़कों पर उतरें।
उन्होंने कमीशन पर पश्चिम बंगाल से ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अधिकारियों को बिना पहले से बताए दूसरे राज्यों में ट्रांसफर करने, बदलने और डेपुटेशन देने के लिए भी हमला किया।
सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि मैं पश्चिम बंगाल की चुनी हुई मुख्यमंत्री हूं, लेकिन इसके बावजूद मेरे अधिकारियों को बिना मुझे पहले से बताए ट्रांसफर कर दिया गया। अब, राज्य में जरूरी और इमरजेंसी एडमिनिस्ट्रेटिव कामों की जिम्मेदारी कौन लेगा? खाना कौन देगा? बाढ़ या तूफान जैसी कुदरती आफतों से कौन निपटेगा? अगर भाजपा ऐसे कामों से मुझे कुचलने की सोच रही है तो वह गलत है।
उन्होंने एसआईआर को लेकर कहा कि यह शर्म की बात है कि पश्चिम बंगाल के नागरिकों को इतने सालों बाद अब अपनी नागरिकता का सबूत देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों को खास तौर पर लॉजिकल डिसकम्पेसी नोटिस भेजे गए थे, और उन्हें यकीन है कि पश्चिम बंगाल में एनआरसी अगला एजेंडा होगा, लेकिन जब तक मैं जिंदा हूं, ऐसा नहीं होने दूंगी। मैं एक भी व्यक्ति को डिटेंशन कैंप नहीं भेजूंगी।
--आईएएनएस
