Jammu Kashmir History : महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित नेताओं ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक हरि सिंह को नेताओं का नमन
महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित नेताओं ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा सहित भाजपा नेताओं ने जम्मू कश्मीर के अंतिम शासक महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन, भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "महान राजनेता और भारत माता के प्रिय सपूत, महाराजा हरि सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन। उनकी चिरस्थायी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, और हमें उन सामाजिक न्याय, समावेशी शासन, एकता और सद्भाव के मूल्यों की याद दिलाती रहेगी, जिनके वे प्रबल समर्थक थे।"

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जम्मू कश्मीर के अंतिम शासक, जननायक, प्रजा के हितेषी और स्वतंत्र भारत के प्रबल समर्थक महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन, भावपूर्ण श्रद्धांजलि।"

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जम्मू कश्मीर के अंतिम शासक, जननायक, प्रजा के हितैषी और स्वतंत्र भारत के प्रबल समर्थक महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।"

बता दें कि महाराज हरि सिंह जम्मू- कश्मीर रियासत के अंतिम शासक थे। वे महाराज रणबीर सिंह के पुत्र और पूर्व महाराज प्रताप सिंह के भाई, राजा अमर सिंह के सबसे छोटे पुत्र थे। इन्हें जम्मू-कश्मीर की राजगद्दी अपने चाचा महाराज प्रताप सिंह से विरासत में मिली थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में चार विवाह किए। उनकी चौथी पत्नी, महारानी तारा देवी से उन्हें एक बेटा था जिसका नाम कर्ण सिंह है।

1923 में अपने चाचा की मृत्यु के बाद, महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के नए राजा बने। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, हरि सिंह चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर एक स्वतंत्र राज्य बना रहे। हालांकि बाद में उन्होंने अपने राज्य में कबायली सशस्त्र लोगों और पाकिस्तानी सेना के आक्रमण के विरुद्ध भारतीय सैनिकों का समर्थन प्राप्त करने के लिए भारत के प्रभुत्व में शामिल होने का निर्णय लिया।

हरि सिंह 1952 तक राज्य के नाममात्र के महाराजा रहे, जब भारतीय सरकार ने राजशाही को समाप्त कर दिया। मुंबई में अपने अंतिम दिन बिताने के बाद 26 अप्रैल 1961 को उनका निधन हो गया।

--आईएएनएस

 

 

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