तिरुवनंतपुरम, 4 जून (आईएएनएस)। लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर केरल में दस्तक दे दी। इसके साथ ही भारत के सबसे महत्वपूर्ण वर्षा मौसम की शुरुआत हो गई है, जिससे किसानों, बाजारों और नीति-निर्माताओं को राहत मिली है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को केरल में मानसून के आगमन की घोषणा की। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून को केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार यह तीन दिन की देरी से पहुंचा है।
आईएमडी की निदेशक नीता के. गोपाल ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून आज केरल में प्रवेश कर चुका है और इसकी उत्तरी सीमा फिलहाल मंगलुरु तक पहुंच गई है। मानसून का प्रभाव कर्नाटक के कुछ हिस्सों और तमिलनाडु के आसपास के क्षेत्रों तक भी फैल चुका है।
उन्होंने कहा, "दक्षिण-पश्चिम मानसून आज केरल में सक्रिय हो गया है। यह मंगलुरु तक पहुंच चुका है। कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। अगले दो से तीन दिनों में मानसून के और उत्तर की ओर बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसके बाद यह कर्नाटक और गोवा तट को भी कवर करेगा।"
नीता गोपाल ने बताया कि 3 जून से केरल तट पर हवाओं की दिशा पश्चिमी हो गई थी, जिसके बाद वर्षा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बादलों की गतिविधियां भी बढ़ीं और लगातार बारिश का दौर जारी है।
केरल में मानसून का आगमन हर साल विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यही पूरे देश में जून से सितंबर तक चलने वाले चार महीने के वर्षा चक्र की शुरुआत का संकेत देता है। केरल पहुंचने के बाद मानसून आमतौर पर चरणबद्ध तरीके से उत्तर भारत की ओर बढ़ता है और जुलाई के मध्य तक देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेता है।
मानसून की प्रगति का भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। देश की लगभग 51 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि अब भी वर्षा पर निर्भर है और कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश से प्रभावित होता है।
कृषि पर निर्भर करोड़ों लोगों की आजीविका के लिए बारिश की मात्रा और उसका वितरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य मानसून ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को बढ़ावा देता है, खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित करता है और उपभोक्ता वस्तुओं, बुनियादी ढांचे तथा व्यापार जैसे कई क्षेत्रों की संभावनाओं को आकार देता है।
कारोबारी जगत भी मानसून पर करीबी नजर रखता है, क्योंकि अच्छी बारिश से कृषि उत्पादन बढ़ता है, ग्रामीण क्रय शक्ति मजबूत होती है और समग्र आर्थिक विकास को गति मिलती है।
आईएमडी ने पहले ही संकेत दिया था कि अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में मानसून की आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं।
हालांकि केरल में मानसून का आगमन यह नहीं दर्शाता कि पूरे देश में तुरंत बारिश शुरू हो जाएगी, लेकिन यह मानसून की देशव्यापी यात्रा की औपचारिक शुरुआत जरूर है। आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे, जब मौसम वैज्ञानिक मानसून की गति और उसके विस्तार पर नजर रखेंगे।
ऐसे देश में, जहां कृषि, जल संसाधन और आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक मौसम पर निर्भर हैं, केरल में मानसून की पहली बारिश पूरे वर्ष की आर्थिक संभावनाओं को प्रभावित करने वाले मौसम की शुरुआत का संकेत मानी जाती है।
--आईएएनएस
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