जल संसाधन दिवस : संरक्षण ही घटते जल स्रोत का समाधान

जल संसाधन दिवस : संरक्षण ही घटते जल स्रोत का समाधान

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल 10 अप्रैल को जल संसाधन दिवस मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि हमें याद दिलाने का दिन है कि पानी के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। जल संरक्षण, इसके उचित प्रबंधन और प्राकृतिक जल स्रोतों को दूषित होने से बचाने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ही जल संसाधन दिवस मनाया जाता है।

हम रोजमर्रा की जिंदगी में पानी का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन अक्सर उसकी अहमियत को नजरअंदाज कर देते हैं जो भविष्य के लिए संकट पैदा कर सकता है। भले ही पृथ्वी पर लगभग 71 प्रतिशत सतह पानी से ढकी हुई है लेकिन उसमें से केवल 3 प्रतिशत ही ऐसा मीठा पानी है जो इंसान पी सकता है या उपयोग कर सकता है। वहीं, अगर हम भारत की स्थिति देखें तो आंकड़े और गंभीर हो जाते हैं।

भारत का हिस्सा दुनिया के कुल भूभाग में सिर्फ 2.45 प्रतिशत है लेकिन हमारी आबादी दुनिया की लगभग 16 प्रतिशत है। इसके बावजूद हमारे पास दुनिया के पानी का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या, जल स्रोतों का अत्यधिक दोहन और उनका असमान वितरण भारत में पानी की उपलब्धता को लगातार कम कर रहा है।

सतही जल जैसे नदियां, झीलें, तालाब और जलाशय, हमारे लिए मुख्य जल स्रोत हैं। मानसून और हिमालय की बर्फ के पिघलने से ये नदियां जीवनदान देती हैं। पूरे देश की नदियों में औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 1,869 घन किलोमीटर है, लेकिन इसका सिर्फ 37 प्रतिशत ही हम प्रभावी रूप से इस्तेमाल कर पाते हैं।

केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि देश में निरंतर और संचयी प्रयासों के परिणामस्वरूप भूजल की समग्र स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। सीजीडब्ल्यूबी के गतिशील भूजल संसाधन आकलन आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 से 2025 के बीच 432 बीसीएम (अरब घन मीटर) से बढ़कर 448.52 बीसीएम हो गया है। इसी दौरान भूजल दोहन लगभग 247.22 अरब घन मीटर आंका गया है।

हमारे देश में पानी का सबसे बड़ा इस्तेमाल कृषि में होता है। सतही जल का 89 प्रतिशत और भूजल का 92 प्रतिशत कृषि के लिए जाता है। औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा बहुत कम है। सतही जल का सिर्फ 2 प्रतिशत और भूजल का 5 प्रतिशत औद्योगिक क्षेत्र में इस्तेमाल होता है। घरों में पानी का इस्तेमाल सतही जल का लगभग 9 प्रतिशत है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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