Himanta Biswa Sarma Initiative : मुख्यमंत्री सरमा ने असम में गुरुजोना संग्रहालय के निर्माण की आधारशिला रखी, वृंदावनी वस्त्र लौटाने की प्रक्रिया शुरू

असम की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए बनेगा विशेष संग्रहालय
मुख्यमंत्री सरमा ने असम में गुरुजोना संग्रहालय के निर्माण की आधारशिला रखी, वृंदावनी वस्त्र लौटाने की प्रक्रिया शुरू

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को कहा कि राज्य धीरे-धीरे अपनी “गौरवशाली विरासत” को फिर से हासिल कर रहा है। उन्होंने गुवाहाटी में एक विश्वस्तरीय संग्रहालय की आधारशिला रखी, जहां मध्यकालीन संत-विद्वान श्रीमंत शंकरदेव द्वारा निर्मित पवित्र वस्त्र ‘वृंदावनी वस्त्र’ को सुरक्षित रखा जाएगा।

आधारशिला समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल असम के उस लंबे प्रयास का महत्वपूर्ण कदम है, जिसके तहत इस अनमोल धरोहर को उसकी जन्मभूमि में वापस लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “एक-एक कर असम अपनी गौरवशाली विरासत को वापस हासिल कर रहा है। आज हमने वृंदावनी वस्त्र को असम लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।”

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभालने के पहले दिन उन्हें दो प्राथमिकताओं 'विकास और विरासत' पर एक साथ काम करने की सलाह दी थी, तभी से हमारी सरकार दोनों मोर्चों पर लगातार काम कर रही है। गुरुजोना की इस अमर रचना की वापसी को अंतिम रूप देना इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सरमा ने वृंदावनी वस्त्र की वापसी में सहयोग के लिए जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन का आभार जताया और इस पवित्र वस्त्र को सुरक्षित रखने और प्रदर्शित करने के लिए विशेष संग्रहालय के निर्माण में उनके समर्थन की सराहना की।

उन्होंने कहा, “असम की जनता की ओर से मैं जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने हमारी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दिखाई।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल केवल गुरुजोना की विरासत को वापस लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के संकल्प को भी मजबूत करती है।

उन्होंने कहा, “हमारी पहचान को आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के खतरे हैं। गुरुजोना के आशीर्वाद से हम इसकी रक्षा करेंगे।”

प्रस्तावित संग्रहालय गुवाहाटी में एक प्रमुख सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित होने की उम्मीद है, जो असम की समृद्ध वैष्णव परंपरा को प्रदर्शित करेगा और राज्य की ऐतिहासिक व आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को मजबूत करेगा।

--आईएएनएस

 

 

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