Giriraj Singh Statement : ममता बनर्जी ने अपने फायदे के लिए सरकारी कर्मचारियों का कर रही हैं राजनीतिकरण : गिरिराज सिंह

गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए पश्चिम बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति को उजागर किया
ममता बनर्जी ने अपने फायदे के लिए सरकारी कर्मचारियों का कर रही हैं राजनीतिकरण : गिरिराज सिंह

बेगूसराय: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मालदा हिंसा मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से सबक लेना चाहिए। वह अपने फायदे के लिए सरकारी कर्मचारियों का राजनीतिकरण कर रही हैं।

गिरिराज सिंह ने कहा कि अपने 15 साल के कार्यकाल में ममता बनर्जी ने सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति की है और जनता के सामने किसी भी गंभीर मुद्दे पर चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी गरीबी, बेरोजगारी, हिंसा और दुष्कर्म से जुड़े मामलों पर न तो बात करती हैं और न ही कभी भी जवाब देती हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की बहाली या कर्मचारियों की समस्याओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह बार-बार कहते हैं कि सातवां वेतन आयोग लागू किया जाए, लेकिन ममता बनर्जी ने आज तक बंगाल में सातवां वेतन आयोग लागू नहीं होने दिया।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के रहते वहां निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। उनके अनुसार, ममता बनर्जी ने पूरे सरकारी कर्मचारियों को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया है, जिसके कारण लोगों का भरोसा सरकार से उठ गया है। उनका कहना है कि जनता अब ऐसे नेताओं के चक्कर में नहीं आएगी और वह अपने अधिकारों और देश की सुरक्षा के लिए सजग है।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि आज भी जिन्ना ओवैसी के रूप में भारत में हैं। उनके अनुसार, ओवैसी चाहते हैं कि भारत में गजवा-ए-हिंद हो।

गिरिराज सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने बंटवारे के समय कुछ गलतियां कीं, लेकिन अगर उस समय सारे मुसलमान पाकिस्तान चले जाते, तो आज ओवैसी जैसा कोई नेता पैदा नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का युवा जाग चुका है और अब कोई भी औरंगजेब पैदा करना चाहेगा, तो उसके सामने शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे वीर पुरुष साफ नजर आएंगे।

--आईएएनएस

 

 

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