
गांधीनगर: गुजरात के गिर जंगल क्षेत्र में बीते दिनों कई शेरों की मौत से फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में हड़कंप मच गया है, जिसको लेकर गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने बड़ी बात कही है।
मंत्री अर्जुन मोधवाडिया का कहना है कि बेबेसिया नामक जानलेवा परजीवी संक्रमण से शेरों की मौत की आशंका है, जबकि अन्य मौतें प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष के कारण हुईं।
राज्य के वन मंत्री और अधिकारियों के अनुसार, यह कोई बड़ी महामारी या व्यापक प्रकोप नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में हुई छिटपुट घटनाएं हैं। राज्य सरकार की ओर से कुछ उपाय भी किए जा रहे हैं। एहतियातन, 17 वयस्क शेरों को आइसोलेट कर उनकी गहन चिकित्सा और निगरानी की जा रही है।
इसके साथ ही जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज और वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं। शेरों को संक्रमण से बचाने और कीलनी (छोटा बाह्य परजीवी) को खत्म करने के लिए 350 से अधिक शेरों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर स्थिति की पूरी निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
वन मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने कहा कि शेरों की मौत की जानकारी मिली तो वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। इसको लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की। 10 किलो किलोमीटर क्षेत्र के शेरों को आइसोलेट किया गया है, जिससे वायरस का संक्रमण न फैलने पाए।
बता दें कि बेबेसिया एक तरह का जानलेवा परजीवी (प्रोटोजोआ) है, जो मलेरिया की तरह काम करता है और जानवरों के सीधे लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह बीमारी मुख्य रूप से 'किलनी' के काटने से फैलती है।
--आईएएनएस
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