एनडीए नेताओं का दावा, महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ विपक्ष

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर की महिलाओं में उत्साह था कि उनकी राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र में इस विधेयक के गिरने के बाद देशभर की महिलाओं में गुस्सा है। वहीं, दूसरी ओर एनडीए नेताओं ने भी नाराजगी जाहिर की है। एनडीए नेताओं का कहना है कि विपक्ष नहीं चाहता कि महिलाएं आगे बढ़े और उन्हें आरक्षण मिले।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न होने पर यूपी सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि जब से देश आजाद हुआ है, महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन किसी भी सरकार ने इसे जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया। जब मोदी सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की तो विपक्ष इस पर भी राजनीति कर रहा है।

मंत्री असीम अरुण ने कहा कि यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी ऐसे लोग हैं जो महिला आरक्षण कानून का विरोध करते हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने पहले भी इस बिल को फाड़ा था और हमेशा इसका विरोध किया है। अब इन्हीं की वजह से देश को और इंतजार करना पड़ेगा। ऐसा नहीं होना चाहिए था।

भाजपा सांसद अरुण गोविल ने कहा कि कांग्रेस, टीएमसी और अन्य पार्टियों ने मिलकर एक साजिश रची है। इन्होंने महिलाओं के अधिकार छीनने का काम किया है।

शिमला से भाजपा नेता पायल बहल वैद्य ने कहा कि प्रियंका गांधी कहती थीं कि वह महिलाओं के कल्याण के लिए बोलती हैं, लेकिन मुझे लगता है कि जब यह विधेयक पारित नहीं हुआ तो जिस तरह से उन्होंने इसका जश्न मनाया, उससे इस बात पर संदेह पैदा होता है कि क्या वह अपनी कही बातों पर विश्वास भी करती हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि ये लोग इस विधेयक को बर्दाश्त नहीं कर सके; चाहे वह कांग्रेस पार्टी हो, समाजवादी पार्टी हो, आरजेडी हो या स्टालिन की पार्टी, इन्होंने बहुत बड़ा पाप किया है।

भाजपा नेता किरण चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी महिलाओं को बढ़ावा देने या उन्हें आगे बढ़ने में मदद करने की बात नहीं की है। मुझे लगता है कि देश के इतिहास में इससे ज्यादा काला अध्याय कोई नहीं होगा। कांग्रेस ने बहुत गलत काम किया है। आने वाले समय में उन्हें इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश की माताओं, बहनों और बेटियों से अत्यंत विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगी है। उन्होंने भारी मन से इस बात पर खेद व्यक्त किया है कि राजनीतिक अधिकार प्रदान करने का वादा शायद पूरी तरह से पूरा नहीं हो पाया।

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जिस तरह विपक्ष, और विशेष रूप से कांग्रेस और ममता बनर्जी ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया, वह उनकी महिला-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम यह दर्शाता है कि किस तरह कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने किसी न किसी रूप में महिलाओं के साथ विश्वासघात और छल किया है। उन्होंने महिलाओं का भरोसा तोड़ा है। यही कारण है कि पूरे प्रदेश और देश भर की महिलाएं आज क्रोधित और आक्रोशित हैं।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख शुरू से ही बहुत स्पष्ट रहा है कि आधी आबादी महिलाओं की है और उन्हें आरक्षण जरूर दिया जाना चाहिए। आपने देखा होगा कि 2023 में यह बिल लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया गया था और पास भी हो गया था। कांग्रेस और विपक्ष के सदस्यों ने भी कहा था कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। हालांकि, इसमें कुछ तकनीकी औपचारिकताएं शामिल थीं।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि 17 अप्रैल को 21वीं सदी के एक काले दिन के रूप में जाना जाएगा। अब समय आ गया है कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाया जाए। यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए था। करोड़ों महिलाएं उम्मीद भरी नजरों से लोकसभा की ओर देख रही थीं, लेकिन इंडिया महागठबंधन के महिला-विरोधी रवैये के कारण उन्होंने इसके खिलाफ वोट दिया। उन्होंने न केवल इस बिल को खत्म कर दिया, बल्कि महिलाओं के दिल भी तोड़ दिए।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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