ED Money Laundering Case : सीसीएल कर्मी समेत 4 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

सीसीएल अधिकारी समेत 4 पर ईडी की कार्रवाई, रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
रांची में मनी लॉन्ड्रिंग केस: सीसीएल कर्मी समेत 4 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल कार्यालय ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत रांची स्थित विशेष न्यायालय में चार आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है।

आरोपियों में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) में सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत संजीव कुमार सिंह, उनकी पत्नी पूनम देवी, छोटे भाई गोपाल कुमार तथा निजी कोयला ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार शामिल हैं। इन सभी पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह शिकायत विशेष न्यायाधीश, सीबीआई-सह-विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए), रांची के समक्ष दाखिल की गई है।

ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, रांची द्वारा दर्ज एफआईआर और 9 दिसंबर 2025 को दायर आरोपपत्र के आधार पर की थी। सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत आपराधिक षड्यंत्र, रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार जैसे आरोप लगाए गए थे।

जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी संजीव कुमार सिंह है, जो सीसीएल के भुरकुंडा प्रशिक्षण संस्थान में सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक के पद पर तैनात था और बरका सयाल क्षेत्र में सुरक्षा प्रभारी के रूप में कार्यरत था। उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली कोयला खदानों से जुड़े निजी ट्रांसपोर्टरों से अवैध आर्थिक लाभ हासिल किया।

ईडी की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संजीव कुमार सिंह ने निजी कोयला ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार से लगभग 5 लाख रुपए की रिश्वत ली, जो सीधे उसकी पत्नी पूनम देवी के एक्सिस बैंक खाते में जमा कराई गई। यह रिश्वत कोयला परिवहन से जुड़े मामलों में अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में ली गई थी।

इसके अलावा, पूनम देवी के खाते में लगभग 4.46 लाख रुपए की जमा राशि भी पाई गई, जिसके स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा सकी। जांच में यह भी सामने आया कि पूनम देवी ने जानबूझकर अपने बैंक खाते का उपयोग अपराध से अर्जित धन को जमा करने के लिए किया और बाद में इस राशि में से 4 लाख रुपए गोपाल कुमार के खाते में स्थानांतरित कर दिए।

गोपाल कुमार ने इस राशि को प्राप्त करने के सात दिनों के भीतर ही नकद निकासी, अन्य खातों में ट्रांसफर और वाहन ऋण की ईएमआई भुगतान के माध्यम से तेजी से खर्च कर दिया। इस तरह उसने अवैध धन को अपनी व्यक्तिगत वित्तीय गतिविधियों में मिलाकर उसे वैध दिखाने का प्रयास किया। ईडी के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया मनी लॉन्ड्रिंग के अंतर्गत आती है, जिसमें अवैध रूप से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से घुमाकर वैध बनाने की कोशिश की जाती है।

जांच के दौरान ईडी ने पीएमएलए की धारा 5 के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों के बैंक खातों में जमा कुल लगभग 9.46 लाख रुपये की राशि को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया है। यह राशि अपराध से अर्जित धन के बराबर बताई गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में संजीव कुमार सिंह के एसबीआई खाते में जमा लगभग 58 हजार रुपए और गोपाल कुमार के एसबीआई खाते में जमा लगभग 8.88 लाख रुपए शामिल हैं।

वर्तमान में यह मामला रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में विचाराधीन है और मामले की सुनवाई जारी है। प्रवर्तन निदेशालय ने संकेत दिया है कि इस मामले में आगे की जांच भी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

--आईएएनएस

 

 

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