Chhattisgarh Naxal Crackdown : 2025 तक 256 माओवादी मारे गए, 1562 ने किया सरेंडर

सुरक्षा बलों के एनकाउंटर और सरेंडर ने नक्सलियों की कमांड स्ट्रक्चर को कमजोर किया।
नक्सली आंदोलन को करारा झटका: 2025 तक 256 माओवादी मारे गए, 1562 ने किया सरेंडर

रायपुर: सुरक्षा बलों ने 2025 में नक्सली आंदोलन को करारा झटका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि मध्य और पूर्वी भारत में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में भारी बढ़त मिली है।

डेटा से पता चलता है कि माओवादी संगठन तेजी से कमजोर हो रहा है, जिसे एनकाउंटर में भारी नुकसान, बड़े पैमाने पर सरेंडर और खास लीडरशिप के खत्म होने से पहचाना जा रहा है।

पुलिस और सुरक्षाकर्मियों से मिले नए डेटा के मुताबिक, उन्होंने पूरे साल नक्सलियों के साथ 99 भीषण एनकाउंटर किए। इन ऑपरेशनों के दौरान 256 नक्सली मारे गए, जबकि 884 गिरफ्तार किए गए।

फोर्स का हौसला बढ़ाने वाली एक बड़ी बात यह रही कि रिकॉर्ड 1,562 नक्सलियों ने सरेंडर किया। सुरक्षा टीमों ने मिलिटेंट्स से 645 हथियार और 875 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) भी बरामद किए। हालांकि, इन ऑपरेशन की कीमत चुकानी पड़ी; ड्यूटी के दौरान 23 जवान शहीद हो गए। बदले में, नक्सलियों ने साल भर में 46 बेगुनाह आम लोगों को मार डाला। गैरकानूनी सीपीआई (माओवादी) के लिए झटका यह है कि पिछले डेढ़ साल में बीस से ज्यादा टॉप नक्सल लीडर खत्म हो गए हैं, जिससे ग्रुप का कमांड स्ट्रक्चर बुरी तरह से बिगड़ गया है।

खास हताहतों में माडवी हिडमा और माडवी हिडमा उर्फ ​​संतोष – दोनों सेंट्रल कमेटी मेंबर; बसवाराजू, जो जनरल सेक्रेटरी और पोलित ब्यूरो मेंबर थे; जयराम उर्फ ​​चलपति; विवेक उर्फ ​​प्रयाग मांझी; नरसिम्हा चलम उर्फ ​​गौतम; गजराला रवि; मोधेम बालकृष्ण उर्फ ​​भास्कर; सहदेव सोरेन उर्फ ​​प्रयाग; राजू उर्फ ​​कट्टा रामचंद्र रेड्डी; कोसा उर्फ ​​कादरी सत्यनारायण रेड्डी; और गणेश उर्फ ​​चमारू दादा – सभी सेंट्रल कमेटी मेंबर शामिल हैं​।

कई दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर्स (डीकेएसजेडसीएम) भी ​​मारे गए, जिनमें सुधीर उर्फ ​​सुधाकर, कुहादामी जगदीश, रेणुका उर्फ ​​भानु, जंगू नवीन उर्फ ​​मधु, मुंडुगुला भास्कर राव, रणधीर, नीति उर्फ ​​निर्मला, रूपेश, जोगन्ना, दसरू और राजू शामिल हैं। दूसरे बड़े नुकसानों में भास्कर (मचेरियाल डीवीसी सेक्रेटरी) और रेणुका (सेंट्रल रीजनल ब्यूरो प्रेस टीम मेंबर) शामिल हैं।

ये आंकड़े नक्सली संगठन की ऑपरेशनल कैपेसिटी और आइडियोलॉजिकल पकड़ में तेज गिरावट का इशारा करते हैं। सैकड़ों कैडर या तो खत्म हो गए, गिरफ्तार हो गए या सरेंडर करने के लिए चुने गए और उनकी टॉप डिसीजन लेने वाली बॉडी बिखर गई, जिससे कभी मजबूत माओवादी नेटवर्क बैकफुट पर आता दिख रहा है।

अधिकारी 2025 के कैंपेन को नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लंबी लड़ाई में एक टर्निंग पॉइंट के तौर पर देख रहे हैं, जो देश के सबसे ज्यादा प्रभावित आदिवासी इलाकों में शांति और विकास की नई उम्मीद लेकर आएगा।

--आईएएनएस

 

 

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