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नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष न्यायालय, अहमदाबाद ने एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए यूको बैंक की चिलोडा ब्रांच, गांधीनगर के तत्कालीन सीनियर मैनेजर मेडम भगवती प्रसाद, तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर भास्कर रमेशचंद्र सोनी और जागृति प्लास्टिक्स और अहमदाबाद की प्रोपराइटर जागृतिबेन निमिष पारिख को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी आरोपियों को तीन वर्ष के कठोर कारावास (आरआई) के साथ कुल 30 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
इस मामले में सीबीआई ने 27 अप्रैल, 2016 को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर मेडम भगवती प्रसाद, बैंक अधिकारी भास्कर रमेशचंद्र सोनी, जागृतिबेन निमिष पारिख और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान सामने आया कि मेडम भगवती प्रसाद ने एक लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाली दस्तावेजों के आधार पर 17 अलग-अलग व्यक्तियों और फर्मों को धोखाधड़ी से कुल 643 लाख रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट और टर्म लोन स्वीकृत किए।
आरोपों के मुताबिक, दिसंबर 2015 तक इन 17 खातों में कुल बकाया राशि 363 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। इनमें से अधिकांश खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बन चुके थे, जबकि शेष खाते भी एनपीए बनने की स्थिति में थे, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 17 नवंबर, 2017 को आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में मुकदमे की सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई न्यायालय ने 23 नवंबर, 2021 के आदेश में एजेंसी को अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए, जिनका अनुपालन करते हुए 10 जून, 2022 को पूरक आरोप पत्र दाखिल किए गए।
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। इस फैसले को बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
--आईएएनएस
डीके/डीकेपी