ओडिशा में एसआईआर को लेकर हम पूरी तरह सचेत : देबी प्रसाद मिश्रा

बीजद ने मतदाता सूची पुनरीक्षण में पारदर्शिता पर उठाए सवाल, भाजपा पर लगाया दबाव का आरोप
ओडिशा में एसआईआर को लेकर हम पूरी तरह सचेत : देबी प्रसाद मिश्रा

भुवनेश्वर: ओडिशा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने राज्य सरकार और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हमलावर रुख अपनाया है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा 14 मई को अधिसूचित इस प्रक्रिया के 1 जुलाई से शुरू होने के बावजूद, तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

बीजद नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा, "हमारी टीम ने ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के साथ विस्तृत चर्चा की। हमने बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारियों) के प्रशिक्षण, मॉड्यूल्स और राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों को जागरूक करने की समय-सीमा के बारे में जानकारी मांगी। कुछ अस्पष्ट क्षेत्रों पर भी स्पष्टता की जरूरत थी।"

मिश्रा ने आगे बताया कि सीईओ ने इसे एक चूक करार दिया और आश्वासन दिया कि ऐसी गलतियां हुई हों तो उन्हें सुधारा जाएगा। हालांकि, बीजद इस मामले पर सतर्क नजर रखे हुए है। मिश्रा ने कहा, "हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और अब पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसलिए हम पूरी तरह सचेत हैं और किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

बीजद का आरोप है कि एसआईआर की तैयारियों में पारदर्शिता की कमी है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन का यह अभियान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से न कटे।

इस मुद्दे के बीच एक और विवाद सामने आया है। बीजद सांसद सुलता देव के वेरिफाइड मेटा अकाउंट के सस्पेंड होने पर उन्होंने भाजपा सरकार पर सीधा आरोप लगाया। सुलता देव ने कहा, "भाजपा मेरे सोशल मीडिया अकाउंट को बंद करवाना चाहती है। यह वेरिफाइड अकाउंट था। वे क्या दिखाना चाहते हैं? मेरे अकाउंट में क्या था? मैंने गरीबों को पानी नहीं मिलने, रहने की जगह न होने जैसे कई मुद्दे उठाए। लाइव जाकर जनता की आवाज बनी।"

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम

 

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